भारत के विपक्षी दलों ने बुधवार को “लोकतंत्र बचाओ” के नाम से देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की योजना का ऐलान किया। यह कदम चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के अभियान को और तेज करता है।
विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग पर बड़े पैमाने पर मतदाता सूची संशोधन में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं।
नेताओं ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगाया है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कीBJP के दबाव में काम कर रहे हैं।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि उसके सभी फैसले कानूनी रूप से वैध हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस मुद्दे पर अलग से कोई टिप्पणी नहीं की है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, “मुख्य मुद्दा वोटों की चोरी है।”
उन्होंने पत्रकारों से कहा, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने वालों को सजा मिले।”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्षी सांसद मंगलवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे।
उन्होंने कहा कि इसके बाद देशभर में “लोकतंत्र बचाओ” रैलियां आयोजित की जाएंगी।
विवाद पिछले सप्ताह इंडियन एक्स्प्रेस की एक रिपोर्ट के बाद बढ़ा, जिसमें कहा गया था कि मतदाता सूची संशोधन से जुड़े कुछ अहम फैसले संभवतः तीन चुनाव आयुक्तों में से दो की मंजूरी के बिना लिए गए थे।
चुनाव आयोग ने इस रिपोर्ट पर कहा कि इसमें “तस्वीर का केवल एक हिस्सा” दिखाया गया है।
आयोग का कहना है कि मतदाता सूची संशोधन का उद्देश्य फर्जी एंट्रीस हटाना और “विदेशी अवैध प्रवासियों” को मतदाता सूची में शामिल होने से रोकना था।



















