तुर्किए के विदेश मंत्री हकान फिदान ने मक्का पैक्ट को लेकर कहा है कि यह हमला करने का समझौता नहीं, बल्कि रक्षा समझौता है। फिदान अंकारा में हंगरी की उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अनीता ओर्बन के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे।
फिदान ने कहा कि इस मुद्दे पर समय-समय पर सामने आने वाली “सस्ती राजनीतिक बयानबाजी” जमीन की हकीकत से मेल नहीं खाती।
उन्होंने कहा कि यमन में वैध सरकार की सेनाएं अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं और सऊदी अरब उनका समर्थन कर रहा है।
फिदान के अनुसार, तुर्किए भी इस मुद्दे को शांति और संवाद के जरिए हल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने जोड़ा की रक्षा समझौते का अर्थ यह है कि अगर समझौते का कोई पक्ष हमला झेलता है, तो उसकी रक्षा के लिए बाकी पक्ष उसके साथ खड़े होते हैं।
इस संदहर्ब में उन्होंने कहा, “तुर्किए किसी दूसरे देश की जमीन पर अपने सैनिक भेजकर वहां हमला करने नहीं जा रहा। यह एक रक्षा समझौता है।”
यमन से आने वाले हमलों के बारे में फिदान ने कहा कि तुर्किए रक्षा के क्षेत्र में क्या योगदान दे सकता है, इस पर पाकिस्तान के साथ तकनीकी आकलन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये सैन्य आकलन हैं और तुर्किये व पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच इस पर काम जारी है।
31 अगस्त को इस्तांबुल में गठबंधन की पहली 'स्ट्रैटेजिक पॉलिटिकल एंड डिफेंस कमिटी' की बैठक में, तुर्किए, सऊदी अरब और पाकिस्तान तनाव कम करने और संयम बरतने का समर्थन करने तथा क्षेत्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने पर सहमत हुए।
अगस्त में तुर्किए, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने 'मक्का अलायंस' बनाया था। इसके बाद तीनों देश स्थायी संस्थान बनाने और सामूहिक प्रतिरोध व रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर सहमत हुए थे।
















