भारत ने अमेरिका के नेतृत्व में आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास सी ड्रैगन 2026 में भाग लिया है, जो इस समय पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में गुआम के पास आयोजित हो रहा है। इस अभ्यास में भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया, जापान और न्यूजीलैंड की सेनाएं भी शामिल हैं।
यह दो सप्ताह तक चलने वाला अभ्यास मुख्य रूप से एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमताओं को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य जटिल समुद्री परिस्थितियों में पनडुब्बियों का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता को बेहतर बनाना है।
अभ्यास को अमेरिकी नौसेना द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसमें शामिल देश उन्नत तकनीकों और रणनीतियों के जरिए समन्वय बढ़ाने और परिचालन दक्षता को परख रहे हैं।
अभ्यास के दौरान नौसैनिक बलों को सिम्युलेटेड और वास्तविक पनडुब्बी लक्ष्यों का पता लगाने और उन पर कार्रवाई करने जैसे जटिल अभ्यासों से गुजरना पड़ता है। इससे उनकी गति, सटीकता और सामूहिक प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण होता है।
ऑस्ट्रेलिया की वायु सेना, रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स, ने एक P-8A पोसेडेन विमान और लगभग 50 कर्मियों को इस अभ्यास में तैनात किया है। वहीं न्यूजीलैंड की रोएल न्यू जेयलेन्ड एयर फोर्स ने भी अपने P-8A विमानों के साथ शामिल है।
ये सभी विमान गुआम के एंडरसन एयर फोर्स बेस से संचालित हो रहे हैं और समुद्र में पनडुब्बियों की खोज और निगरानी के लिए उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
भारत और ऑस्ट्रेलिया, क्वाड नामक गठबंधन के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान से भी जुड़े हुए हैं। इसे व्यापक रूप से चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के उद्देश्य से गठित एक गुट के रूप में देखा जाता है। यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर केंद्रित एक रणनीतिक मंच के रूप में कार्य करता है।









