जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय विधानसभा ने सोमवार को राज्य का दर्जा बहाल करने के समर्थन में एक गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव पारित किया।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यह प्रस्ताव पेश किया और कहा कि राज्य का दर्जा जम्मू-कश्मीर का “अधिकार” है।
प्रस्ताव में नई दिल्ली से जम्मू-कश्मीर को “पूर्ण राज्य का दर्जा” तुरंत और तत्काल बहाल करने की मांग की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की BJP के सदस्यों ने मतदान से पहले वॉकआउट किया। पार्टी के कई नेताओं ने इस प्रस्ताव को “असंवैधानिक” और “राष्ट्र-विरोधी” बताया।
यह प्रस्ताव संवैधानिक रूप से बाध्यकारी नहीं है। इसमें 2000 और 2024 में पारित उन प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया है जिनमें संघीय स्वायत्तता की मांग की गई थी।
2019 में मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर की सीमित स्वायत्तता समाप्त कर दी थी और राज्य को केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किया था। इसके बाद से क्षेत्र के शासन और राजनीतिक अधिकारों को लेकर बहस जारी है।
नई दिल्ली राज्य का दर्जा “उचित समय” पर बहाल करने की बात कहती रही है, लेकिन स्थानीय दल इसकी तत्काल बहाली की मांग कर रहे हैं।
2024 में जम्मू-कश्मीर में 2019 के बाद पहली बार सरकार चुनी गई थी। उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सरकार बनाई थी।
हालांकि, स्थानीय सरकार की शक्तियां सीमित हैं और क्षेत्र में कई अहम प्रशासनिक अधिकार अब भी दिल्ली द्वारा नियुक्त प्रशासक के पास हैं।

























