पश्चिम बंगाल राज्य में दो मामले सामने आने के बाद भारतीय अधिकारियों ने घातक निपाह वायरस को समय पर नियंत्रित करने का आश्वासन दिया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, निपाह वायरस जानवरों से मनुष्यों में फैलता है, इसका कोई टीका उपलब्ध नहीं है और इसकी मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक है।
भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार देर रात एक बयान में कहा, "उन्नत निगरानी, प्रयोगशाला परीक्षण और जमीनी जांच की गई... जिससे मामलों को समय पर नियंत्रित किया जा सका।"
इसमें संक्रमित दोनों मरीजों के बारे में और कोई जानकारी नहीं दी गई।
इसमें आगे कहा गया, "स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है और सभी आवश्यक जन स्वास्थ्य उपाय लागू हैं।" इसमें यह भी बताया गया कि मामलों से जुड़े 196 लोगों का पता लगाया गया है और सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई है।
निपाह वायरस की पहचान सबसे पहले 1998 में हुई थी, जब यह मलेशिया में सुअर पालकों के बीच फैला था।
भारत में निपाह का पहला प्रकोप 2001 में पश्चिम बंगाल में सामने आया था। 2018 में केरल में निपाह से कम से कम 17 लोगों की मौत हुई थी और 2023 में भी इसी दक्षिणी राज्य में दो लोगों की मौत हुई थी।












