चीनी नियंत्रण से बाहर रह रहे तिब्बतियों ने अपनी निर्वासित सरकार के गठन के लिए मतदान किया है। यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब समुदाय अपने आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के बिना भविष्य की संभावनाओं को लेकर तैयारियां कर रहा है।
भारत स्थित केंद्रीय तिब्बती प्रशासन इस निर्वासित समुदाय की एक महत्वपूर्ण संस्था है। विशेष रूप से 2011 में दलाई लामा द्वारा राजनीतिक शक्तियां छोड़ने के बाद इसकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन की चीन द्वारा "एक अलगाववादी राजनीतिक समूह के अलावा कुछ नहीं" कहकर निंदा की गई है।
