स्विस एयर क्वालिटी टेक्नोलॉजी कंपनी IQAir की विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2025 के अनुसार, PM2.5 प्रदूषण के स्तर के आधार पर भारत दुनिया का छठा सबसे प्रदूषित देश रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत का औसत PM2.5 स्तर 48.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो 2024 के 50.6 के मुकाबले मामूली गिरावट है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार यह कमी “सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण” नहीं मानी जा सकती। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सुरक्षित सीमा 5 µg/m³ है।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद जिले का लोनी 2025 में दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहाँ PM2.5 का स्तर 112.5 µg/m³ दर्ज किया गया—जो WHO मानकों से 22 गुना अधिक है।
वहीं, राजधानी शहरों में नई दिल्ली सबसे प्रदूषित रही, जहाँ औसत PM2.5 स्तर 82.2 µg/m³ रहा। इसके बाद ढाका और दुशांबे का स्थान रहा।
रिपोर्ट में 143 देशों के 9,446 शहरों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
केवल 13 देशों में PM2.5 का स्तर WHO के मानकों के अनुरूप पाया गया, जिनमें अधिकांश लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के देश हैं।
दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 17 दक्षिण और मध्य एशिया में स्थित हैं। भारत, पाकिस्तान और चीन के शहर शीर्ष 25 में शामिल हैं।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत 2025–26 तक प्रदूषण 40% घटाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन फंड का बड़ा हिस्सा सड़क धूल नियंत्रण पर खर्च हुआ है, जबकि औद्योगिक और बायोमास प्रदूषण पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि PM10 पर अधिक ध्यान देने के बजाय अधिक खतरनाक PM2.5 पर केंद्रित नीतियों की आवश्यकता है।




