कांग्रेस ने मध्यपूर्व में जारी तनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री इज़राइल द्वारा लेबनान में की जा रही तबाही और अमेरिका-ईरान समझौते को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने की कोशिशों पर “पूरी तरह चुप” हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में युद्ध रोकने के लिए बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा समझौता होता है, तो इसका तत्काल असर होर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने और तेल कीमतों में गिरावट के रूप में दिख सकता है।
रमेश ने कहा कि भारत के लिए ये दोनों मुद्दे बेहद अहम हैं, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है और वहां किसी भी तरह की बाधा से भारत में तेल कीमतों और महंगाई पर असर पड़ सकता है।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या उनके लिए “कथित पितृभूमि” वास्तविक मातृभूमि से ज्यादा अहम है।
पार्टी का आरोप है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ सकता है, इसलिए सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
कांग्रेस ने कहा कि भारत को ऐसी कूटनीति अपनानी चाहिए जो युद्ध रोकने, तेल कीमतों को स्थिर रखने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने पर केंद्रित हो।
























