प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को परीक्षा धोखाधड़ी और पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ “कड़ी सजा” का वादा किया। छात्र आक्रोश और बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच यह उनकी पहली सीधी टिप्पणी मानी जा रही है।
मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से अधिक महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है।” उन्होंने प्रश्नपत्र लीक में शामिल लोगों को सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का आश्वासन दिया।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सोशल मीडिया से उभरे CJP आंदोलन के नेतृत्व में बुधवार को नई दिल्ली में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच फिर झड़पें हुईं।
प्रदर्शनकारी, जिनमें ज्यादातर छात्र और युवा शामिल हैं, पिछले महीने से परीक्षा पेपर लीक को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
सोमवार को मानसून सत्र के पहले दिन प्रदर्शन और तेज हो गए थे, जब हजारों प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। तनाव बढ़ने पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव भी किया।
पुलिस के अनुसार, हिंसा में सुरक्षा कर्मियों सहित कम से कम 178 लोग घायल हुए। यह राजधानी में पिछले करीब पांच वर्षों की सबसे बड़ी सड़क रैलियों में से एक बताई जा रही है।
CJP, जिसके सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर हैं, मई में उस विवाद के बाद उभरा था, जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा कथित तौर पर युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और “परजीवियों” से किए जाने की बात सामने आई थी।
शुरुआत में यह आंदोलन व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया, लेकिन बाद में इसका एजेंडा बेरोजगारी, युवाओं के अवसर, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और मोदी सरकार की कथित बढ़ती सत्तावादी शैली जैसे मुद्दों तक फैल गया।
भारत की परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आई अनियमितताओं ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर किया है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक के बाद 20 लाख से अधिक उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी थी। इसके अलावा करीब 20 लाख हाई स्कूल छात्रों की ऑनलाइन मार्किंग से जुड़े विवाद ने भी लोगों के गुस्से को और बढ़ाया है।




















