दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न और पीछा करने के आरोपों से बरी कर दिया। सिंह के वकील ने कहा कि अदालत ने उन्हें “सम्मानपूर्वक बरी” किया है।
69 वर्षीय बृजभूषण शरण भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद हैं। उन पर कुछ महिला पहलवानों ने छेड़छाड़ और यौन संबंधों की मांग करने जैसे आरोप लगाए थे। सिंह ने इन आरोपों से इनकार किया था।
यह मामला 2023 में बड़े विरोध प्रदर्शनों का कारण बना था। विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता विनेश फोगाट और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक सहित कई शीर्ष पहलवानों ने सिंह को भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद से हटाने और कार्रवाई की मांग को लेकर दिल्ली में धरना दिया था।
सिंह के वकील राजीव मोहन ने सोमवार को कहा कि अदालत ने गवाहों के बयानों में “असंगतियां” और “मुख्य मुद्दों पर विरोधाभास” पाए, जिसके बाद यह फैसला सुनाया गया।
फैसले के बाद सिंह के समर्थकों ने पटाखे फोड़े, उन पर फूल बरसाए और नारेबाजी की।
बृजभूषण शरण सिंह ने पत्रकारों से कहा, “मैंने उस दिन कहा था कि अगर दोषी पाया गया तो फांसी लगा लूंगा। आज मैं ‘सम्मानपूर्वक बरी’ होकर बाहर निकल रहा हूं।”
वहीं विनेश फोगाट ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ ऊंची अदालत में अपील करेंगी और सिंह के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।
उन्होंने X पर लिखा कि सत्ता पक्ष के एक शक्तिशाली नेता के खिलाफ सड़कों पर उतरना और शिकायत दर्ज कराना बहुत साहस का काम था।
दिल्ली पुलिस ने 2023 में महीनों तक चले विरोध और बढ़ते दबाव के बाद सिंह के खिलाफ महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न और पीछा करने के आरोपों में मामला दर्ज किया था।
इस आंदोलन ने देशभर का ध्यान खींचा था। पहलवानों ने दिल्ली में धरना दिया और आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों पर कार्रवाई करने में प्रशासन ने देरी की।
प्रदर्शन के दौरान विनेश फोगाट और अन्य खिलाड़ियों को संसद की ओर मार्च करने की कोशिश के दौरान हिरासत में लिए जाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं।




















