मध्य पूर्व संकट के बीच भारत को 90 दिन का तेल भंडार बढ़ाने की चेतावनी, संसदीय समिति की रिपोर्ट
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और खासकर होरमुज में अनिश्चितता ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाला है, जिससे भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक अहम मुद्दा बन गई है।
ईरान पर अमेरिकी-इज़राएली हमले से जुड़े क्षेत्रीय तनाव और ईंधन संकट के बीच भारत की संसदीय समिति ने कच्चे तेल के भंडार को बढ़ाकर वैश्विक मानक 90 दिनों तक पहुंचाने की सिफारिश की है।
संसद की पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी सातवीं रिपोर्ट “डिमांड फॉर ग्रांट्स (2026-27)” में कहा कि सरकार को रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।
समिति ने सुझाव दिया कि जहां भूगर्भीय परिस्थितियां अनुकूल हों, वहां अतिरिक्त भूमिगत तेल भंडारण बनाए जाएं ताकि आपात स्थितियों में आपूर्ति बाधित न हो।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और खासकर होरमुज में अनिश्चितता ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाला है, जिससे भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक अहम मुद्दा बन गई है।
यह भी कहा गया है कि एलपीजी को मौजूदा लाभार्थियों, खासकर ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के लिए अधिक सुलभ और किफायती बनाया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता के रूप में भारत की ऊर्जा जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, भारत की कुल प्राथमिक ऊर्जा मांग 2024 में लगभग 2.2 करोड़ बैरल तेल समतुल्य प्रतिदिन से बढ़कर 2050 तक करीब 4.36 करोड़ बैरल प्रतिदिन हो सकती है।
एजेंसी का अनुमान है कि 2024 से 2025 के बीच वैश्विक तेल मांग में वृद्धि का 40% से अधिक योगदान भारत से आएगा, जबकि प्राकृतिक गैस की मांग में वृद्धि का लगभग 8% हिस्सा भी भारत से होगा।