भारत की राजधानी नई दिल्ली में बुधवार को वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। शहर के कुछ हिस्सों में हवा में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषक कणों PM2.5 की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित दैनिक अनुशंसित सीमा से 30 गुना से अधिक दर्ज की गई।
वायु गुणवत्ता निगरानी संस्था आईक्यूएयर के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को दिल्ली के कुछ इलाकों में PM2.5 का स्तर 461 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक पहुंच गया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, PM2.5 के लिए अनुशंसित 24 घंटे की औसत सीमा 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। हालांकि, 461 का आंकड़ा कुछ स्थानों पर दर्ज प्रदूषण का स्तर है, जिसकी तुलना दैनिक औसत सीमा से की जा रही है।
प्रदूषण में यह बढ़ोतरी ऐसे समय दर्ज हुई है जब प्रशासन ने तीन दिन पहले ही वाहनों की आवाजाही और निर्माण गतिविधियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए थे।
रविवार को मनाए जाने वाले दिवाली त्योहार से पहले दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका जताई गई है।
दिवाली के दौरान पटाखे जलाए जाने से हवा में पहले से मौजूद प्रदूषक तत्वों की मात्रा और बढ़ सकती है।
इस महीने सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के अवसर पर सीमित मात्रा में तथाकथित 'ग्रीन पटाखों' के इस्तेमाल की अनुमति दी थी।
ग्रीन पटाखों को सामान्य पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण पैदा करने के उद्देश्य से विकसित किया जाता है।
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में पटाखों से संबंधित प्रतिबंधों का अक्सर उल्लंघन होता रहा है।
PM2.5 हवा में मौजूद अत्यंत सूक्ष्म प्रदूषक कण होते हैं, जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है।
ये कण सांस के माध्यम से फेफड़ों के भीतर गहराई तक पहुंच सकते हैं और कुछ परिस्थितियों में रक्त प्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं।
लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से श्वसन और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
सूक्ष्म कणों से होने वाले वायु प्रदूषण को फेफड़ों के कैंसर सहित कई गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से भी जोड़ा गया है।
दिल्ली और आसपास के महानगरीय क्षेत्र में तीन करोड़ से अधिक लोग रहते हैं, जिससे प्रदूषण का प्रभाव बड़ी आबादी पर पड़ता है।


















