तुर्किए के इस्लामाबाद स्थित दूतावास में 15 जुलाई लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर स्मृति कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 15 जुलाई 2016 की नाकाम तख्तापलट कोशिश के दौरान मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम में तुर्किए के इस्लामाबाद में राजदूत इरफान नेजिरोग्लू, पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्री अताउल्लाह तरार, उत्तरी साइप्रस तुर्क गणराज्य की इस्लामाबाद प्रतिनिधि बुकेत कोप, कई विदेशी मिशनों के प्रतिनिधि, राजदूत और आमंत्रित अतिथि शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत 15 जुलाई के शहीदों की याद में एक मिनट के मौन से हुई। इसके बाद तुर्किए और पाकिस्तान के राष्ट्रगान गाए गए।
अपने संबोधन में राजदूत नेजिरोग्लू ने कहा कि 15 जुलाई 2016 को फेतुल्लाह आतंकी संगठन यानी FETÖ ने तुर्किए की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को गिराने, लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने तथा तुर्की जनता की इच्छा को कुचलने की कोशिश की थी।
उन्होंने कहा कि उस “दुखद रात” में तख्तापलट की कोशिश करने वालों ने तुर्किए की राज्य संस्थाओं को निशाना बनाया। उनके अनुसार, राष्ट्रपति परिसर और तुर्किए की ग्रैंड नेशनल असेंबली यानी संसद पर भी बमबारी की गई।
नेजिरोग्लू ने कहा, “क्या आप इन हत्यारों की अपने ही लोगों के प्रति दुश्मनी का स्तर देख सकते हैं? उस समय मैं तुर्की संसद का महासचिव था। जब संसद भवन पर बमबारी हुई, मैं जनरल असेंबली हॉल में था। उन्होंने संसद पर तीन बार बम गिराए।”
राजदूत ने पाकिस्तान की जनता के प्रति आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक सदी पहले तुर्किए के स्वतंत्रता संग्राम में भी साथ खड़ा था और FETÖ की तख्तापलट कोशिश के खिलाफ भी उसने तुर्किए का समर्थन किया।




















