भारत में तुर्किए के राजदूत अली मुरात एरसोय ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की अपील करते हुए कहा है कि भारत और तुर्किए इतने बड़े और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश हैं कि वे एक-दूसरे से दूरी बनाए नहीं रख सकते।
गुरुवार को नई दिल्ली में तुर्किए के 103वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए एरसोय ने कहा कि दोनों देशों के संबंध अब 'रणनीतिक व्यावहारिकता' के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा, “भारत और तुर्किए इतने बड़े देश हैं कि किसी के अधीन नहीं रह सकते और रणनीतिक रूप से इतने महत्वपूर्ण हैं कि एक-दूसरे के लिए अजनबी बने नहीं रह सकते।”
तुर्किए के राजदूत ने अप्रैल 2026 में दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच हुई राजनीतिक परामर्श बैठक को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
एरसोय ने इसे भारत और तुर्किए के बीच नियमित कूटनीतिक संवाद बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण मोड़ बताया।
उन्होंने कहा, “पिछले 12 महीनों में अंकारा और नई दिल्ली ने धीरे-धीरे संवाद के स्थायी और भरोसेमंद माध्यम विकसित करने पर ध्यान दिया है।”
राजदूत ने कहा कि बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता दोनों देशों की राजनीतिक परिपक्वता और रणनीतिक दूरदर्शिता को दर्शाती है।
नई दिल्ली में आयोजित समारोह में भारतीय विदेश मंत्रालय की संयुक्त सचिव (दक्षिण यूरोप) अल्पना दुबे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
समारोह को संबोधित करते हुए अल्पना दुबे ने तुर्किये को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने भारत और तुर्किए को दो सभ्यतागत राष्ट्र बताते हुए कहा कि दोनों देश जी20 के सदस्य हैं और उनके बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
दुबे ने आर्थिक सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।
उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां तुर्किए में कारोबार कर रही हैं, जबकि तुर्किए की कंपनियों को भारत के आर्थिक विकास से लाभ मिल रहा है।




















