भारत सरकार ने सोमवार को देश को माओवादी उग्रवाद से मुक्त घोषित किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद के निचले सदन लोकसभा में इस संबंध में बयान देते हुए कहा कि माओवादी संगठनों की शीर्ष संरचना लगभग पूरी तरह ध्वस्त कर दी गई है।
लोकसभा में “वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त करने के प्रयासों” पर चर्चा के दौरान शाह ने कहा,
“माओवादियों का पोलित ब्यूरो और केंद्रीय ढांचा लगभग पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। हमारा लक्ष्य 31 मार्च तक भारत को नक्सल-मुक्त बनाना था। औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने पर देश को सूचित किया जाएगा, लेकिन मैं कह सकता हूं कि हम नक्सल-मुक्त हो चुके हैं।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की नीति सख्त बनी रहेगी। शाह ने कहा, “हमारी सरकार की नीति है कि बातचीत केवल उन्हीं से होगी जो हथियार डालते हैं, और गोली का जवाब गोली से दिया जाएगा।”
गृह मंत्री के अनुसार, नक्सल हिंसा के कारण पिछले वर्षों में करीब 20,000 लोगों की जान गई, जिनमें लगभग 5,000 सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 12 करोड़ लोग लंबे समय से गरीबी में जीवन यापन कर रहे थे, जो इस समस्या से प्रभावित रहे हैं।
माओवादी समूह पिछले तीन दशकों से पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में सक्रिय रहे हैं और खुद को आदिवासी समुदायों के अधिकारों के लिए लड़ने वाला बताते रहे हैं।
भारत सरकार पहले ही मार्च तक इस उग्रवाद को समाप्त करने का लक्ष्य तय कर चुकी थी, जिसे अब पूरा करने का दावा किया गया है।













