'इज़रायल-ईरान संघर्ष'
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होर्मुज़ जलडमरूमध्य में कम से कम 18 भारत से जुड़े जहाज़ अभी भी फंसे हुए हैं
18 भारतीय जहाज़ों में तीन एलपीजी टैंकर, एक एलएनजी कैरियर और चार कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं। इन जहाज़ों पर कुल 485 नाविक सवार हैं और सभी सुरक्षित बताए गए हैं।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में कम से कम 18 भारत से जुड़े जहाज़ अभी भी फंसे हुए हैं
FILE PHOTO: चित्र में होर्मुज जलडमरूमध्य का नक्शा और 3डी प्रिंटेड तेल पाइपलाइन दिखाई गई है। / Reuters

मध्य पूर्वे में जारी संघर्ष के बीच भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति लेकर जा रहे कम से कम 18 भारतीय झंडे वाले जहाज़ फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। 10 विदेशी झंडे वाले जहाज़ भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में लंगर डाले हुए हैं।

पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने सोमवार को बताया कि फंसे हुए 10 विदेशी जहाज़ों में तीन एलपीजी, चार कच्चे तेल और तीन एलएनजी लेकर भारत आ रहे हैं।

वहीं, 18 भारतीय जहाज़ों में तीन एलपीजी टैंकर, एक एलएनजी कैरियर और चार कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं। इन जहाज़ों पर कुल 485 नाविक सवार हैं और सभी सुरक्षित बताए गए हैं।

सरकार ने कहा कि उसकी प्राथमिकता भारतीय झंडे वाले जहाज़ों को सुरक्षित रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य से निकालना है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, जहां सामान्य समय में दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और एलएनजी का परिवहन होता है।

अधिकारियों के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण यह मार्ग लगभग ठप हो गया है और इसे उच्च जोखिम वाला क्षेत्र घोषित किया गया है। युद्ध से पहले बीमा प्रीमियम जहां बीमित मूल्य का करीब 0.04 प्रतिशत था, वहीं अब कुछ मामलों में यह बढ़कर 0.7 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

हालांकि, हाल के दिनों में आठ भारतीय जहाज़ सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इनमें दो एलपीजी टैंकर—BW TYR और BW ELM—शामिल हैं, जो करीब 94,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इनमें से एक मुंबई और दूसरा न्यू मैंगलोर पहुंचने वाला है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल प्राथमिकता फंसे हुए जहाज़ों को सुरक्षित निकालने की है और अभी खाड़ी देशों में अतिरिक्त आपूर्ति के लिए जहाज़ वापस भेजने पर विचार नहीं किया जा रहा है।

विदेश मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और ईरान सहित क्षेत्रीय देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क में हैं, ताकि भारतीय जहाज़ों को सुरक्षित मार्ग मिल सके।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है। देश के लगभग 40 प्रतिशत कच्चे तेल, 50 प्रतिशत से अधिक एलएनजी और करीब 90 प्रतिशत एलपीजी आयात होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते होता है, जिससे यह मार्ग भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है।

स्रोत:Others
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