भारती वायु सेना ने नए उन्नत रडार खरीदने का करार लिया
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन पर्वतीय रडार प्रणालियों का डिजाइन और विकास DRDO के बेंगलुरु स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स और रडार विकास प्रतिष्ठान द्वारा किया गया है।
भारती वायु सेना ने नए उन्नत रडार खरीदने का करार लिया
रक्षा मंत्रालय ने स्वदेशी रूप से विकसित दो पर्वतीय रडारों की खरीद के लिए बेल ईएल के साथ 1,950 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है। / Ministry of Defence, India

भारत सरकार ने स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मंगलवार को दो उन्नत पर्वतीय रडारों की खरीद के लिए 1,950 करोड़ रुपये का करार किया है।

रक्षा मंत्रालय ने यह समझौता भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए किया है।

यह सौदा ‘बाय (इंडियन–इंडिजिनसली डिजाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड)’ श्रेणी के तहत किया गया है, जो सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन पर्वतीय रडार प्रणालियों का डिजाइन और विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के बेंगलुरु स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स और रडार विकास प्रतिष्ठान द्वारा किया गया है। BEL इन प्रणालियों के निर्माण, स्थापना और संचालन के साथ-साथ संबंधित उपकरण और बुनियादी ढांचे की जिम्मेदारी निभाएगा।

पर्वतीय रडार विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनाती के लिए तैयार किए जाते हैं, जहां पारंपरिक रडार सिस्टम लाइन-ऑफ-साइट सीमाओं और कठोर मौसम के कारण प्रभावी नहीं होते। इन उन्नत प्रणालियों से भारतीय वायु सेना की निगरानी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे लड़ाकू विमानों, ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे हवाई खतरों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा।

अधिकारियों के मुताबिक, इन रडारों की तैनाती से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली और मजबूत होगी। इससे स्थिति की बेहतर जानकारीऔर प्रतिक्रिया समय में सुधार होगा।

यह परियोजना घरेलू रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को भी बढ़ावा देगी, जिसमें स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं और एमएसएमई की भागीदारी शामिल होगी। साथ ही, इससे रोजगार के अवसर बढ़ने और तकनीकी क्षमताओं के विकास में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

रक्षा मंत्रालय द्वारा स्वदेशी खरीद को प्राथमिकता देने की व्यापक नीति के तहत यह करार किया गया है, जिससे दीर्घकाल में महत्वपूर्ण सैन्य तकनीकों में आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिलेगी।

स्रोत:Other
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