भारत ने रविवार को नेपाल की उस आपत्ति को खारिज कर दिया, जिसमें उसने उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के रास्ते होने वाली आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर विरोध जताया था। नई दिल्ली ने कहा कि क्षेत्रीय दावों का “एकतरफा कृत्रिम विस्तार” स्वीकार्य नहीं है।
यह प्रतिक्रिया तब आई जब नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे के जरिए वार्षिक यात्रा की तैयारियों पर कड़ा एतराज जताया। काठमांडू का दावा है कि यह क्षेत्र उसके अधिकार क्षेत्र में आता है और इस मुद्दे पर उससे परामर्श नहीं किया गया।
भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि लिपुलेख दर्रा वर्षों पुराना, स्थापित और पारंपरिक मार्ग है, जिसका उपयोग लंबे समय से यात्रा के लिए किया जाता रहा है।
पिछले सप्ताह विदेश मंत्रालय ने घोषणा की थी कि इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा जून से अगस्त के बीच आयोजित की जाएगी। यात्रा दो मार्गों उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथू ला दर्रे से संचालित होगी।
लिपुलेख दर्रे को लेकर भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से सीमा विवाद बना हुआ है, जो समय-समय पर कूटनीतिक तनाव का कारण बनता रहा है।


















