इस्लामाबाद स्थित तुर्किये के दूतावास में गणतंत्र दिवस की 103वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दोनों देशों के संबंधों को 'दो आत्माएं, एक दिल' बताया।
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान और तुर्किये के बीच भाईचारे का रिश्ता पाकिस्तान के अस्तित्व में आने से भी पुराना है।”
शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष का विशेष उल्लेख किया।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भारत पर आक्रामक कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उस समय तुर्किये ने पाकिस्तान का समर्थन किया था।
उन्होंने कहा, “पिछले साल मार्का-ए-हक के दौरान, जब पाकिस्तान को भारत की खुली आक्रामकता का सामना करना पड़ा और हमारी संप्रभुता की गंभीर परीक्षा हुई, तब तुर्किये पूरी प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ हमारे पक्ष में मजबूती से खड़ा रहा।”
पाकिस्तान मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष की याद में 'यौम-ए-मार्का-ए-हक' मनाता है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तुर्किए की ओर से दी गई सहायता को भी याद किया।
उन्होंने कहा कि 2005 में पाकिस्तान में आए विनाशकारी भूकंप और 2010 की भीषण बाढ़ के बाद तुर्किये ने महत्वपूर्ण मानवीय सहायता प्रदान की थी।
शरीफ के अनुसार, दोनों देशों के बीच संबंध केवल रक्षा और कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आपदा राहत और मानवीय सहयोग में भी दिखाई देते हैं।
उन्होंने तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन और तुर्किये की जनता को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं।
शहबाज शरीफ ने 7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच हस्ताक्षरित मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि यह समझौता तीनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय कानून और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है।
मक्का समझौते के तहत तीनों देशों ने रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।




















