बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत–रूस सहयोग की ज़रूरत विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा
जयशंकर ने भारत और रूस के बीच “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” को भरोसे और पारस्परिक सम्मान पर आधारित बताया।
भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने कहा है कि उभरती बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में देशों के बीच व्यापक सहयोग की आवश्यकता बढ़ गई है।
मॉस्को में आयोजित “भारत–रूस: द्विपक्षीय संबंधों के लिए नई दिशा” सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि BRICS, शंघाई सहयोग संगठन, G20 और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर सहयोग और समन्वय को मजबूत करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान “मानवता-प्रथम” और “जन-केंद्रित” दृष्टिकोण के साथ रूस के साथ मिलकर साझा चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए तैयार है।
उन्होंने यह भी कहा कि 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा ने स्वास्थ्य, शिक्षा, समुद्री सहायता और व्यापार जैसे क्षेत्रों में नए अवसर खोले हैं।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी दोनों देशों के बीच विदेश नीति समन्वय की सराहना की।
उन्होंने भारत की “स्वतंत्र विदेश नीति” की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह उसे बहुध्रुवीय विश्व में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में स्थापित करती है।
लावरोव ने यह भी बताया कि 2025 में भारत–रूस द्विपक्षीय व्यापार लगभग 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिसे 2030 तक 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लगभग 96% व्यापार अब राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है।