सामाजिक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा है कि भारत को अपने राजनीतिक नेतृत्व के चयन के तरीके में “शांतिपूर्ण क्रांति” की जरूरत है। स्वतंत्रता दिवस से पहले जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि अगर भारत को 2047 तक एक “सम्मानजनक राष्ट्र” बने रहना है, तो देश में बड़ा बदलाव आवश्यक है।
वांगचुक ने इसे “भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन” बताते हुए नागरिकों से अपील की कि वे ऐसे निस्वार्थ, निर्भीक, चरित्रवान और सक्षम पुरुषों तथा महिलाओं के नाम सुझाएं, जो देश के भविष्य को बेहतर दिशा दे सकें।
उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में बुनियादी बदलाव की जरूरत है, ताकि नेतृत्व केवल सत्ता या दलगत हितों के आधार पर नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवा, ईमानदारी और नैतिक साहस के आधार पर चुना जाए।
वांगचुक का बयान ऐसे समय आया है जब देश में बेरोजगारी, परीक्षा अनियमितताओं, पर्यावरणीय संकट, भ्रष्टाचार और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर युवाओं और नागरिक समूहों के बीच नाराजगी देखी जा रही है।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे केवल आलोचना तक सीमित न रहें, बल्कि देश के लिए बेहतर नेतृत्व और वैकल्पिक राजनीतिक संस्कृति के निर्माण में भागीदारी करें।
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख के पर्यावरण, स्थानीय अधिकारों, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।





















