मध्य पूर्व तनाव के चलते भारत में फर्टलाइज़र संकट की आशंका, किसानों में बढ़ी चिंता

भारत फर्टलाइज़र का एक बड़ा आयातक है और इसकी बड़ी मात्रा ओमान, सऊदी अरब और क़तर जैसे खाड़ी देशों से आती है।

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FILE PHOTO: कोलकाता की एक फैक्ट्री में एक मजदूर सुखाने के लिए फर्टलाइज़र उतार रहा है। / Reuters

मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर अब भारत के कृषि क्षेत्र पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। फर्टलाइज़र की कीमतों में तेजी और संभावित आपूर्ति संकट को लेकर देशभर के किसानों में चिंता बढ़ गई है।

भारत फर्टलाइज़र का एक बड़ा आयातक है और इसकी बड़ी मात्रा ओमान, सऊदी अरब और क़तर जैसे खाड़ी देशों से आती है। मौजूदा हालात में इन आपूर्तियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

एक फर्टलाइज़र विक्रेता के अनुसार, आने वाले महीनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने रायटर्स से कहा की, “जून और जुलाई में हमारे पास उर्वरकों का स्टॉक नहीं रहेगा। युद्ध की वजह से आयात प्रभावित हो रहा है, जिससे सप्लाई मिलना मुश्किल हो जाएगा। हम मुख्य रूप से खाड़ी देशों, खासकर क़तर से आयात करते हैं, जिसका कृषि पर सीधा असर पड़ेगा।”

जून और जुलाई का समय भारत में खरीफ फसलों की बुवाई का होता है, जब चावल, मक्का, कपास और तिलहन जैसी फसलों के लिए उर्वरकों की मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे में आपूर्ति में कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

विशेष रूप से यूरिया को लेकर चिंता ज्यादा है, जो भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला उर्वरक है। यूरिया उत्पादन के लिए तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) एक अहम कच्चा माल है, जिसकी आपूर्ति पर भी असर पड़ा है।

भारत के लिए सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता क़तर है, लेकिन ईरान द्वारा अहम जलमार्ग ‘हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य’ को बंद करने के कदम से शिपमेंट बाधित हो गए हैं।

हालांकि, इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव (IFFCO) ने भरोसा दिलाया है कि उसके पास पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।