परीक्षा पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ देशव्यापी छात्र आंदोलनों के बाद केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद में कानून को और सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा। प्रस्तावित बदलावों के तहत पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए अधिकतम सजा दोगुनी कर 10 साल तक की जा सकती है, जबकि जुर्माना 10 लाख डॉलर से अधिक हो सकता है।
सरकार ने कहा कि मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी, ताकि छात्रों के भविष्य से जुड़े अपराधों में जल्द न्याय मिल सके।
यह विधायी पहल उन विरोध प्रदर्शनों के बाद आई है, जिनमें देशभर के छात्रों ने पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों और शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर आंदोलन किया था। इन प्रदर्शनों के दबाव में पिछले सप्ताह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था।
करीब 12 घंटे चली गरमागरम बहस के बाद सदन की कार्यवाही बुधवार तक स्थगित कर दी गई। विपक्ष ने सरकार पर बार-बार पेपर लीक रोकने में विफल रहने और मौजूदा कानून को प्रभावी ढंग से लागू न करने का आरोप लगाया।
विपक्षी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा, “हम सरकार को संशोधन पास कराकर अपनी संलिप्तता को बेगुनाही के प्रमाणपत्र में बदलने नहीं देंगे।”
कई विपक्षी सांसदों ने संशोधनों का सीधा विरोध नहीं किया, लेकिन कहा कि परीक्षा व्यवस्था में केवल सजा बढ़ाने से बात नहीं बनेगी, बल्कि व्यापक संरचनात्मक सुधारों की जरूरत है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संसद में कहा, “आइए हम कुछ अधिक महत्वपूर्ण करें ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनाएं जिसमें ये अपराध पहले ही कठिन हो जाएं।”
संसद का मानसून सत्र पिछले सप्ताह शुरू हुआ था, लेकिन शुरुआती दिनों में विपक्ष ने छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाबदेही की मांग करते हुए कार्यवाही बार-बार बाधित की।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हालिया प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए 18 वर्ष से कम उम्र के उन छात्रों को रिहा करने का आदेश दिया, जिनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
CJP ने कहा कि अदालत का अंतरिम आदेश अब भी कुछ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों और जांच को आगे बढ़ाने की अनुमति देता है। संगठन ने इसे सरकार द्वारा युवाओं को दिए गए आश्वासन के विपरीत बताया।
























