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भारत के हथियार निर्यात में 2025 में वृद्धि हुई, जिसमें आर्मेनिया बड़ा खरीदार रहा।
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल और पिनाका रॉकेट सिस्टम अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत के सबसे लोकप्रिय उत्पाद बनकर उभरे हैं।
भारत के हथियार निर्यात में 2025 में वृद्धि हुई, जिसमें आर्मेनिया बड़ा खरीदार रहा।
मनीला में आयोजित एशियाई रक्षा एवं सुरक्षा प्रदर्शनी (ADAS) में भारत की ब्रह्मोस एयरोस्पेस कंपनी / AFP
11 घंटे पहले

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 4.11 अरब डॉलर के रक्षा उपकरणों का निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 62 प्रतिशत की वृद्धि है। इस प्रदर्शन के साथ भारत दुनिया के शीर्ष 25 हथियार निर्यातकों में शामिल हो गया है।

इस निर्यात का बड़ा हिस्सा आर्मेनिया को गया, जिसने लगभग 2 अरब डॉलर के भारतीय रक्षा उपकरण खरीदे। इनमें आकाश-1एस मिसाइल प्रणाली, पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर, स्वाथी रडार और एटीएजीएस होवित्जर शामिल हैं।

आर्मेनिया, भारत की उस रणनीतिक योजना में अहम कड़ी है, जिसके जरिए वह पाकिस्तान या चीन के नियंत्रण वाले मार्गों से गुजरे बिना यूरोपीय बाजारों तक पहुंच बनाना चाहता है। पूर्व सोवियत गणराज्य रहा आर्मेनिया, इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर परियोजना का भी एक महत्वपूर्ण साझेदार है, जो ईरान के रास्ते भारत को यूरोप से जोड़ सकता है।

वहीं, हथियार निर्यातक के रूप में भारत की पहचान अभी नई है। इससे पहले नई दिल्ली को मुख्य रूप से दुनिया के दूसरे सबसे बड़े हथियार आयातक के रूप में जाना जाता था, जैसा कि स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की 2026 रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है।

भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात कर रहा है। जहां अमेरिका, फ्रांस, रूस और इज़राइल जैसे देशों को पुर्ज़े और तकनीकी घटक भेजे जा रहे हैं, वहीं फिलीपींस, वियतनाम, इंडोनेशिया और खाड़ी देशों को पूर्ण रक्षा प्रणालियां उपलब्ध कराई जा रही हैं।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल और पिनाका रॉकेट सिस्टम अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत के सबसे लोकप्रिय उत्पाद बनकर उभरे हैं।

भारत, जो पहले दुनिया का प्रमुख हथियार आयातक रहा है, अब धीरे-धीरे निर्यातक देश के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और स्वदेशीकरण नीति के तहत रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

जहां मध्य पूर्व में तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संघर्षों के कारण कई देश अपने रक्षा आयात बढ़ा रहे हैं, भारत के लिए यहाँ अवसर पैदा हो रहे हैं। फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देशों के बाद अब वियतनाम भी ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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