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मुज़फ्फरनगर दंगों पर जो सैको की किताब भारत में वितरित नहीं करेगा पेंगुइन
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव श्रीनागेश ने कहा कि पुस्तक में दिखाए गए एक नक्शे में भारत की सीमाएं गलत थीं।
मुज़फ्फरनगर दंगों पर जो सैको की किताब भारत में वितरित नहीं करेगा पेंगुइन
माल्टीज़-अमेरिकी कार्टूनिस्ट और पत्रकार जो सैको X/bbcmundo

प्रसिद्ध ग्राफिक पत्रकार और उपन्यासकार जो सैको की पुस्तक ‘द वन्स एंड फ्यूचर रायट’ का भारत में आधिकारिक वितरण नहीं किया जाएगा। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने प्रकाशन-पूर्व और कानूनी समीक्षा के दौरान सामने आई आपत्तियों के बाद पुस्तक के वितरण से पीछे हटने का फैसला किया है।

135 पृष्ठों की यह पुस्तक उत्तर प्रदेश में 2013 में हुए मुज़फ्फरनगर सांप्रदायिक दंगों का दस्तावेज़ी चित्रण करती है। इन दंगों में 60 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और करीब 40 हजार लोग विस्थापित हुए थे। पुस्तक को पिछले साल प्रकाशित किया गया था और अगस्त-सितंबर तक भारतीय दुकानों में उपलब्ध होने की संभावना थी।

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव श्रीनागेश ने कहा कि पुस्तक में दिखाए गए एक नक्शे में भारत की सीमाएं गलत थीं। इसके अलावा प्रकाशक ने सामग्री से जुड़े कुछ सवाल उठाते हुए उनके स्रोत और संदर्भ भी मांगे थे, लेकिन पेंगुइन ब्रिटेन की ओर से जवाब नहीं मिला।

श्रीनागेश ने कहा कि गलत नक्शे की जानकारी होने और उसमें आवश्यक बदलाव नहीं किए जाने की स्थिति में कंपनी पुस्तक का वितरण नहीं कर सकती। नक्शे के अलावा पुस्तक की किन बातों पर आपत्ति जताई गई, इसका पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

हालांकि, पुस्तक भारत के कुछ ऑनलाइन मंचों पर उपलब्ध है, जो ब्रिटेन के थोक विक्रेताओं से प्रतियां मंगाते हैं। दक्षिण दिल्ली की कुछ पुस्तक दुकानों ने भी इसे सीधे ब्रिटेन से आयात किया है। इस वितरण व्यवस्था पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का नियंत्रण नहीं है।

गाज़ा, फिलिस्तीन और बाल्कन संघर्षों पर अपने सचित्र पत्रकारिता कार्यों के लिए चर्चित सैको दंगों के करीब एक वर्ष बाद मुज़फ्फरनगर पहुंचे थे। उन्होंने सरकारी अधिकारियों, राजनीतिक नेताओं, ग्राम प्रधानों, पत्रकारों और हिंसा से प्रभावित लोगों से बातचीत के आधार पर यह पुस्तक तैयार की।

सैको ने पुस्तक को भारत के “मेहनती ग्रामीण पत्रकारों” को समर्पित किया है। इनमें से कई लोगों ने शोध और अनुवाद में उनकी सहायता की और पुस्तक में भी दिखाई देते हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था कि पत्रकारिता केवल अलग-अलग पक्षों के बयान दर्ज करना नहीं, बल्कि झूठ की पहचान कर वास्तविक घटनाओं का पता लगाने का प्रयास भी है।

स्रोत:Others
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