भारत ने बुधवार से दुनिया की “सबसे बड़ी” जनगणना प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है। इस बार जनगणना में पहली बार स्वतंत्रता के बाद जाति से जुड़ा डेटा भी शामिल किया जाएगा, जिसे एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, यह जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी और पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी। साथ ही, पहली बार लोगों को स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) की सुविधा भी दी गई है।
पहले चरण में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। यह चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसमें घरों की सूची और आवास से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी। इस दौरान प्रत्येक परिवार का सर्वेक्षण लगभग 30 दिनों के भीतर पूरा किया जाएगा।
दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें व्यक्तियों से जुड़ी जानकारी जैसे जनसांख्यिकी, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शिक्षा, प्रवासन, प्रजनन और जाति संबंधी डेटा एकत्र किया जाएगा।
भारत में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जिसमें देश की आबादी 1.21 अरब दर्ज की गई थी। जाति आधारित डेटा आखिरी बार 1931 में एकत्र किया गया था, इसलिए इस बार इसे शामिल करना विशेष महत्व रखता है।
परंपरागत रूप से भारतीय समाज में जाति व्यवस्था के तहत ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्गों का उल्लेख होता है, जबकि दलित समुदाय इन वर्गों से बाहर माना जाता रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में भारत की जनसंख्या 1.4 अरब तक पहुंच गई, जिससे वह चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया।












