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नकदी संकट से जूझ रही स्पाइसजेट ने पायलटों का वेतन रोका
स्पाइसजेट ने वेतन भुगतान में देरी की पुष्टि करते हुए कहा कि कर्मचारियों को पिछले कई महीनों से अपनाई जा रही प्रक्रिया के तहत चरणों में भुगतान किया जा रहा है।
नकदी संकट से जूझ रही स्पाइसजेट ने पायलटों का वेतन रोका
FILE PHOTO: स्पाइसजेट का बोइंग 737 यात्री विमान अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरता है।

वित्तीय संकट से जूझ रही भारतीय विमानन कंपनी स्पाइसजेट ने मार्च से कई पायलटों के वेतन भुगतान में देरी की है। कंपनी ने स्वीकार किया है कि कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से भुगतान किया जा रहा है और परिचालन को स्थिर करने के लिए वह सरकार समर्थित आपात ऋण लेने की कोशिश कर रही है।

रॉयटर्स द्वारा देखे गए आंतरिक संदेशों और दो पायलटों के अनुसार, कंपनी में कई महीनों का वेतन लंबित है। मार्च तक स्पाइसजेट के पास 375 पायलट थे। जांचे गए संदेश 180 से अधिक सदस्यों वाले एक व्हाट्सऐप समूह से थे, जिसमें बोइंग विमान उड़ाने वाले पायलट और कंपनी का कम से कम एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल था।

एक संदेश में कंपनी के उड़ान संचालन विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष वीरेंद्र मल्होत्रा ने कथित तौर पर वेतन में देरी के कारण कर्मचारियों के सामने आ रही मुश्किलों को स्वीकार किया था। हालांकि मल्होत्रा ने रॉयटर्स से कहा कि उन्होंने ऐसा कोई संदेश जारी नहीं किया।

स्पाइसजेट ने वेतन भुगतान में देरी की पुष्टि करते हुए कहा कि कर्मचारियों को पिछले कई महीनों से अपनाई जा रही प्रक्रिया के तहत चरणों में भुगतान किया जा रहा है। कंपनी के मुताबिक, अधिकतर कर्मचारियों को मार्च का वेतन दिया जा चुका है।

आंतरिक संदेशों में एक पायलट ने कहा कि रोज़मर्रा के खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है और आवश्यक वित्तीय जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए उन्हें दूसरे लोगों से सहायता लेनी पड़ रही है। विमानन नियामक ने वेतन की अनिश्चितता और उसके संभावित सुरक्षा प्रभावों से जुड़े सवालों पर तत्काल जवाब नहीं दिया।

स्पाइसजेट ने बताया कि वह केंद्र सरकार की आपात ऋण सीमा गारंटी योजना के तहत धन जुटाने की कोशिश कर रही है। इस योजना में एयरलाइनों को सात वर्ष की अवधि के लिए 1,500 करोड़ रुपये तक का सरकारी गारंटी वाला ऋण मिल सकता है। कंपनी ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट सहित बाहरी परिस्थितियां उसके परिचालन और नकदी प्रवाह को प्रभावित कर रही हैं।

विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों ने स्पाइसजेट की पहले से मौजूद वित्तीय समस्याओं को और गंभीर बना दिया है। इन परिस्थितियों का असर इंडिगो और एयर इंडिया जैसी बड़ी विमानन कंपनियों पर भी पड़ा है।

स्पाइसजेट कभी भारत की दूसरी सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन थी और 2019 में उसकी बाज़ार हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत थी। अब यह घटकर 3.4 प्रतिशत रह गई है और कंपनी चौथे स्थान पर पहुंच गई है। मई में उसकी निर्धारित उड़ानों की संख्या घटकर 3,053 रह गई, जो जनवरी में 4,494 थी।

कंपनी के पास फिलहाल 21 परिचालन विमान हैं। स्पाइसजेट ने हाल में एक बोइंग 737 मैक्स विमान को दोबारा सेवा में शामिल किया है और जुलाई में तीन एयरबस ए-320 विमान पट्टे पर लेने की योजना बनाई है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष कम से कम दो विमान पट्टादाताओं ने भुगतान में चूक को लेकर स्पाइसजेट को नोटिस भेजे हैं। कंपनी ने इन नोटिसों पर टिप्पणी नहीं की। स्पाइसजेट के शेयरों में इस वर्ष करीब 60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

स्रोत:reuters
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