भारत ने बाढ़ से प्रभावित नेपाल को बिजली संकट से उबरने में मदद के लिए बिजली निर्यात को मंजूरी दे दी है। पिछले महीने आई विनाशकारी बाढ़ से नेपाल की कई जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा था।
भारत के विद्युत मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि नेपाल को इस वर्ष के अंत तक रोजाना 18 घंटे के लिए 600 मेगावाट तक बिजली भेजी जाएगी।
मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह मंजूरी नेपाल को इस कठिन समय में अपनी बिजली जरूरतें पूरी करने में मदद करेगी और भारत-नेपाल के पुराने ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करेगी।
जनवरी 2027 से नेपाल को दी जाने वाली बिजली की मात्रा की समीक्षा दिसंबर में की जाएगी।
26 अगस्त को चीन-नेपाल सीमा पर ग्लेशियर से जुड़े पर्वतीय ढहाव के बाद आई बाढ़ ने नेपाल और तिब्बत में भारी तबाही मचाई थी। इस आपदा में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि नेपाल में 5,300 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में कई जलविद्युत परियोजनाओं के मजदूर भी शामिल हैं।
नेपाल ने हाल के वर्षों में बांध निर्माण और जलविद्युत परियोजनाओं के जरिए अपने बिजली ढांचे को तेजी से विकसित किया है। सदी की शुरुआत में जहां बड़ी आबादी बिजली से वंचित थी, वहीं अब देश के लगभग सभी तीन करोड़ लोगों तक बिजली ग्रिड की पहुंच हो चुकी है।
जलविद्युत नेपाल के लिए भारत और बांग्लादेश को निर्यात का भी महत्वपूर्ण स्रोत बन गया था। हालांकि, बाढ़ के बाद कम से कम 12 जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने के कारण अधिकारियों ने बिजली निर्यात रोक दिया था।




















