विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन जैसे बड़े पड़ोसी देशों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन दोनों देशों को इन मुद्दों को स्वीकार करते हुए बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है।
नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन दोनों के हित में एक व्यावहारिक और स्थिर संबंध बनाए रखना है।
उन्होंने कहा, “बड़े देशों और बड़े पड़ोसियों के बीच मुद्दे और मतभेद होंगे। हमें इस वास्तविकता को स्वीकार करना होगा और इन मुद्दों का समाधान करना होगा।”
भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर भारत के रुख में किसी बदलाव के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि नई दिल्ली की स्थिति पहले जैसी ही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा विवाद का कोई भी अंतिम समाधान पूरी भारत-चीन सीमा को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
विदेश मंत्री ने कहा कि 1980 के दशक से भारत और चीन के संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना रहा है।
दोनों देशों ने सीमा पर सैन्य गतिविधियों को नियंत्रित करने और टकराव रोकने के लिए कई समझौते किए थे।
इन समझौतों में सैनिकों की गश्त, दोनों पक्षों के बीच दूरी बनाए रखने और आमने-सामने की स्थिति में संकेतों तथा प्रक्रियाओं का पालन करने जैसे प्रावधान शामिल थे।
लेकिन जयशंकर के अनुसार, वर्ष 2020 में कई सीमावर्ती क्षेत्रों में इन व्यवस्थाओं का उल्लंघन हुआ और गलवान घाटी में हिंसक झड़प के दौरान सैनिकों की मौत हुई।





















