पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान से इस्लामाबाद की मध्यस्थता में हुए समझौते के तहत फिर से बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है। पाकिस्तान के राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि दोनों पक्षों में “भरोसे की कमी” अब भी बनी हुई है, जिसके कारण समझौता लागू नहीं हो पा रहा।
अबू धाबी स्थित अंग्रेजी दैनिक The National को दिए इंटरव्यू में अहमद ने कहा कि पाकिस्तान दोनों पक्षों से संपर्क बनाए हुए है और उच्च स्तर पर बातचीत की खुली लाइनें मौजूद हैं।
जून में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से हुए इस्लामाबाद मेमोरेंडम में संघर्ष समाप्त करने, स्थायी समाधान के लिए 60 दिन की वार्ता अवधि तय करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक जहाजों के लिए दोबारा खोलने की व्यवस्था शामिल थी।
ईरान ने अमेरिका पर समझौते के अहम प्रावधान लागू न करने का आरोप लगाया है, जिनमें प्रतिबंधों और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। वहीं, वॉशिंगटन और खाड़ी देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से मुक्त नौवहन की मांग की है।
अहमद ने कहा कि समझौते को लागू करने को लेकर “इच्छाशक्ति की थोड़ी कमी” भी दिखती है, लेकिन पाकिस्तान अपनी कोशिश जारी रखे हुए है।
उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि स्थिति को हल करने और एक व्यापक व अंतिम समझौते तक पहुंचने का सबसे बेहतर तरीका बातचीत की मेज पर लौटना है। इसके लिए इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग में ढांचा मौजूद है।”
यह पूछे जाने पर कि बातचीत बहाल करने में कौन सा पक्ष अधिक अनिच्छुक है, पाकिस्तानी राजदूत ने कहा कि इसे इतना सरल बनाकर नहीं देखा जा सकता। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि कठिनाइयों के बावजूद दोनों पक्ष फिर से वार्ता की ओर लौट सकते हैं।
अहमद ने कहा कि पाकिस्तान अब भी मानता है कि अमेरिका-ईरान टकराव से निकलने का एकमात्र टिकाऊ रास्ता नए सिरे से बातचीत है।
गाजा पर बोलते हुए पाकिस्तानी राजदूत ने कहा कि कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इजरायली नीतियां भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य की संभावना को खतरे में डाल रही हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अधिक सख्त रुख अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि गाजा योजना पूरी तरह लागू नहीं हो रही है और युद्धविराम का सम्मान नहीं किया जा रहा। उनके अनुसार, युद्धविराम की घोषणा के बाद भी गाजा में सैकड़ों लोग मारे गए हैं।
















