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बाइबिल की ‘खोई हुई जनजाति’ से संबंध का दावा करने वाले करीब 240 भारतीय इज़राइल पहुंचे
ये “बेनेई मेनाशे” समुदाय के पहले सदस्य हैं, जो नवंबर में इज़राइली सरकार द्वारा इस समुदाय के लगभग 6,000 लोगों के पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता देने के फैसले के बाद इज़राइल पहुंचे हैं।
बाइबिल की ‘खोई हुई जनजाति’ से संबंध का दावा करने वाले करीब 240 भारतीय इज़राइल पहुंचे
बनेई मेनाशे समुदाय के 1,200 लोगों में से हैं, जिन्हें इजरायल ने 2026 में इजरायल में प्रवास करने की मंजूरी दी थी। X/RyanRozbiani

बाइबिल की एक ‘खोई हुई जनजाति’ से अपना संबंध बताने वाले करीब 240 भारतीय गुरुवार को तेल अवीव हवाईअड्डे पर पहुंचे। यह आगमन इज़राइल सरकार के उस अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत इस समुदाय के लोगों को इज़राइल में बसाया जा रहा है।

हवाईअड्डे पर नवागंतुकों का स्वागत इज़राइली झंडे के रंग से सजे गुब्बारों के मेहराब के नीचे किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने पारंपरिक यहूदी गीत गाकर उनका स्वागत किया।

ये “बेनेई मेनाशे” समुदाय के पहले सदस्य हैं, जो नवंबर में इज़राइली सरकार द्वारा इस समुदाय के लगभग 6,000 लोगों के पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता देने के फैसले के बाद इज़राइल पहुंचे हैं। यह समुदाय भारत के पूर्वोत्तर राज्यों मणिपुर और मिजोरम में रहता है।

यह समुदाय दावा करता है कि उसका संबंध मनश्शे से है, जिन्हें बाइबिल में इज़राइल की ‘खोई हुई जनजातियों’ में से एक का पूर्वज माना जाता है। माना जाता है कि 720 ईसा पूर्व असीरियाई विजेताओं ने इस जनजाति को निर्वासित कर दिया था।

करीब 20 वर्षों से इज़राइल में रह रहे दागान जोलात हवाईअड्डे पर अपने एक करीबी मित्र से मिलने पहुंचे, जिन्हें उन्होंने अपना भाई जैसा बताया।

उन्होंने एएफपी से कहा, “हम अपने गांव में पड़ोसी थे और वहां गिने-चुने यहूदी परिवारों में से थे। नौ साल बाद मैं उसे फिर देख रहा हूं।”

उन्होंने बताया, “जब मेरा बेटा छोटा था, भारत में मेरा यह दोस्त अक्सर उसे अपनी गोद में उठाकर घुमाता था।”

‘शावेई इज़राइल’ नामक संगठन, जो ‘खोई हुई जनजातियों’ के वंशजों का पता लगाने का काम करता है, के अनुसार 1990 के दशक से अब तक लगभग 4,000 बेनेई मेनाशे इज़राइल आ चुके हैं, जबकि करीब 7,000 लोग अब भी भारत में रह रहे हैं।

समुदाय की मौखिक परंपरा के अनुसार, उनके पूर्वज सदियों पहले फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन होते हुए भारत पहुंचे थे और इस दौरान उन्होंने खतना जैसी कुछ यहूदी धार्मिक परंपराओं को बनाए रखा।

हालांकि, भारत में 19वीं सदी के मिशनरियों ने उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित कर दिया था।

गुरुवार को पहुंचे 250 बेनेई मेनाशे को उत्तरी इज़राइल में बसाया जाएगा। इज़राइली नागरिकता पाने के लिए उन्हें यहूदी धर्म अपनाना होगा।

आव्रजन मंत्री ओफिर सोफेर, जिन्होंने हवाईअड्डे पर उनका स्वागत किया, ने इसे “ऐतिहासिक क्षण” बताया।

उन्होंने कहा, “यह एक ऐसे अभियान की शुरुआत है, जिसके तहत पूरे समुदाय को इज़राइल लाया जाएगा। हर साल 1,200 लोगों के पुनर्वास की योजना है।”

मणिपुर में पिछले लगभग तीन वर्षों से मुख्य रूप से हिंदू मेइती समुदाय और ईसाई कूकी समुदाय के बीच समय-समय पर हिंसक झड़पें होती रही हैं, जिनमें 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

अप्रैल 2025 से अब तक 18,000 से अधिक यहूदी इज़राइल में आकर बस चुके हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत कम है।

स्रोत:AFP
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