भारत में बढ़ते रसोई गैस संकट को लेकर विपक्षी सांसदों ने बुधवार को संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “खाली सिलेंडर, खोखले वादे” लिखे बैनर लेकर सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
यह संकट होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण उत्पन्न हुआ है, जहां अमेरिका–इज़राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है।
विपक्षी नेता महुआ माजी ने कहा कि छोटे शहरों और कस्बों में एलपीजी सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। उन्होंने सरकार से इस संकट से निपटने की स्पष्ट रणनीति सामने रखने की मांग की।
आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी मार्लेना ने कहा, 'आज पूरे देश में पेट्रोल सिलेंडर खरीदने के लिए लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। पूरा देश जानना चाहता है कि नरेंद्र मोदी और उनका '56 इंच का सीना' कहां गया। इस देश के आम लोग क्यों परेशान हैं?'
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है। पिछले वर्ष देश ने लगभग 3.3 करोड़ टन रसोई गैस की खपत की, जिसमें करीब 60% हिस्सा आयात से पूरा हुआ।
इन आयातों का लगभग 90% हिस्सा मध्य पूर्व से आता है, जिससे क्षेत्रीय संकट का सीधा असर भारत पर पड़ा है।











