गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम के एक मुस्लिम निवासी को विदेशी घोषित करने वाले फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता भारतीय नागरिकता साबित करने का अपना कानूनी बोझ पूरा नहीं कर सका, जबकि उसने 1951 के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स यानी NRC, कई मतदाता सूचियां, स्कूल प्रमाणपत्र, PAN कार्ड और मतदाता पहचान पत्र सहित 15 दस्तावेज पेश किए थे।
जस्टिस कल्याण राय सुराना और जस्टिस शमीमा जहां की पीठ ने मंगलवार को कहा कि फॉरेनर्स एक्ट, 1946 की धारा 9 के तहत यह साबित करने की जिम्मेदारी याचिकाकर्ता पर थी कि वह विदेशी नहीं है। अदालत के अनुसार, पेश किए गए दस्तावेज इस बोझ को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
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