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सूडान और भारत के बीच आर्थिक व सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा
सूडान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करने और साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
सूडान और भारत के बीच आर्थिक व सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा
भारत-सूडान विदेश कार्यालय परामर्श का 9वां दौर 4 मई 2026 को पोर्ट सूडान में आयोजित किया गया। / Ministry of External Affairs India

सूडान और भारत के विदेश मंत्रालयों के बीच सोमवार को पोर्ट सूडान में राजनीतिक परामर्श का दौर आयोजित हुआ, जिसमें आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ आतंकवाद-रोधी प्रयासों पर चर्चा की गई।

यह बैठक कुछ महीनों पहले सूडान के विदेश मंत्री मोहिउद्दीन सालेम की नई दिल्ली यात्रा के बाद हुई है, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत की थी। उस दौरान द्विपक्षीय सहयोग तंत्र को सक्रिय करने और रणनीतिक आर्थिक साझेदारी स्थापित करने पर सहमति बनी थी।

पोर्ट सूडान स्थित विदेश मंत्रालय मुख्यालय में आयोजित इस नौवें दौर की बैठक की सह-अध्यक्षता सूडान के विदेश मंत्रालय के अवर सचिव माविया उस्मान खालिद और भारत के विदेश मंत्रालय में पश्चिम एशिया एवं उत्तरी अफ्रीका के संयुक्त सचिव सुरेश कुमार ने की।

सूडान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करने और साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों देशों ने कृषि, ऊर्जा, दवा उद्योग, खनन और डिजिटल परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में आर्थिक संबंधों को बढ़ाने पर सहमति जताई। साथ ही, निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में व्यापार को सुगम बनाने के उपायों पर भी चर्चा हुई, जिसमें वित्तीय लेन-देन को आसान बनाने के तरीकों की समीक्षा की गई, ताकि वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें शुरू करने की दिशा में भी विचार-विमर्श किया गया।

भारत, सूडान के लिए आवश्यक आयात का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, खासकर कृषि मशीनरी और वस्त्रों के क्षेत्र में।

परामर्श के दौरान द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई, जिसमें स्वास्थ्य संस्थानों के पुनर्वास, दवा निर्माण के विस्तार, कृत्रिम अंग (प्रोस्थेटिक्स) और टेलीमेडिसिन के क्षेत्र में सहयोग शामिल है।

जारी संघर्ष के कारण सूडान के अधिकांश विशेष अस्पताल बंद हो चुके हैं और चिकित्सा कर्मियों का पलायन हुआ है। ऐसे में जटिल बीमारियों के इलाज के लिए हजारों सूडानी मरीज भारत का रुख कर रहे हैं।

स्रोत:Others
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