लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार पर लद्दाख को राजनीतिक स्वायत्तता और संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करने के अपने पुराने आश्वासनों से पीछे हटने का आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की है कि लद्दाख को विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश बनाया जाए, ताकि स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र के प्रशासन और राजनीतिक फैसलों में अधिक भागीदारी मिल सके।
गुरुवार को नई दिल्ली स्थित लद्दाख भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वांगचुक ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ अब तक हुई बातचीत और लद्दाख की राजनीतिक मांगों पर सरकार के रुख की आलोचना की।
लेह एपेक्स बॉडी के सदस्य वांगचुक ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने पहले की बातचीत में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की संभावना से कभी इनकार नहीं किया था।
अरुणाचल प्रदेश का उदाहरण देकर केंद्र से किया सवाल
वांगचुक ने लद्दाख को अधिक राजनीतिक स्वायत्तता देने की मांग के समर्थन में अरुणाचल प्रदेश का उदाहरण दिया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब चीन के साथ सीमा साझा करने वाले रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अरुणाचल प्रदेश को राज्य का दर्जा दिया जा सकता है, तो लद्दाख को अधिक राजनीतिक अधिकार देने में क्या बाधा है।
उनका तर्क था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्र की संवेदनशील स्थिति को स्थानीय लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग खारिज करने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
वांगचुक ने लद्दाख के लोगों के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सरकार के प्रस्ताव और स्थानीय मांगों के बीच बड़ा अंतर
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वांगचुक के साथ अधिवक्ता विक्रम हेगड़े भी मौजूद थे।
हेगड़े केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ बातचीत के दौरान लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस को कानूनी सलाह देते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव और लद्दाख के लोगों की राजनीतिक आकांक्षाओं के बीच अब भी काफी बड़ा अंतर मौजूद है।
उनके अनुसार, बातचीत के बावजूद स्थानीय प्रतिनिधियों की प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी है।
2019 में केंद्रशासित प्रदेश बना था लद्दाख
अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद लद्दाख को एक अलग केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया था।
हालांकि, जम्मू-कश्मीर के विपरीत लद्दाख को अपनी विधानसभा नहीं दी गई।
इसके बाद लद्दाख के विभिन्न नागरिक और राजनीतिक संगठनों ने क्षेत्र के लिए अधिक राजनीतिक स्वायत्तता, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग उठाई।
लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस इन मांगों को लेकर केंद्र सरकार के साथ बातचीत में शामिल रहे हैं।























