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कांग्रेस ने सरकार से सवाल उठाए , कहा ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान 'आइसोलेट' नहीं हुआ
जयराम रमेश ने X पर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बाद में अलग-अलग देशों में यह दावा सौ से अधिक बार दोहराया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी इसका खंडन नहीं किया।
कांग्रेस ने सरकार से सवाल उठाए , कहा ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान 'आइसोलेट' नहीं हुआ
FILE: कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश। X/ANI

कांग्रेस ने गुरुवार को ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर कहा कि भारत की व्यापक कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान वैसा 'आइसोलेट' नहीं हुआ, जैसा 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद हुआ था।

कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की उपलब्धियों और सशस्त्र बलों के साहस को याद करते हुए कुछ बातों को भी ध्यान में रखना ज़रूरी है।

उन्होंने कहा कि 10 मई 2025 को भारतीय समयानुसार शाम 5 बजकर 37 मिनट पर ऑपरेशन सिंदूर को रोकने वाले संघर्षविराम की पहली घोषणा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की थी। रमेश के मुताबिक, रुबियो ने दावा किया था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप से यह संभव हुआ।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बाद में अलग-अलग देशों में यह दावा सौ से अधिक बार दोहराया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी इसका खंडन नहीं किया।

कांग्रेस नेता ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के 30 मई 2025 के सिंगापुर में दिए बयान का भी ज़िक्र किया। रमेश के अनुसार, जनरल चौहान ने कहा था कि शुरुआती चरण में भारत को सामरिक गलतियों के कारण नुकसान हुआ, लेकिन समीक्षा और सुधार के बाद भारतीय बलों ने पाकिस्तान के अंदर गहराई तक सटीक हमले किए और अपनी क्षमता तथा अनुकूलनशीलता दिखाई।

रमेश ने यह भी कहा कि 10 जून 2025 को जकार्ता में एक सेमिनार के दौरान इंडोनेशिया स्थित भारतीय दूतावास के रक्षा अटैची ने स्वीकार किया था कि 7 मई 2025 को भारत ने विमान गंवाए थे। उनके मुताबिक, यह नुकसान राजनीतिक नेतृत्व की ओर से तय सीमाओं के कारण हुआ।

कांग्रेस महासचिव ने डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह के 4 जुलाई 2025 के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान की प्रतिक्रिया में चीन की “बहुत गहरी भूमिका” थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने पाकिस्तान को महत्वपूर्ण उपकरण और गोला-बारूद के साथ-साथ सैटेलाइट तस्वीरें और रियल-टाइम टारगेटिंग समर्थन भी दिया।

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद मोदी सरकार की चीन के प्रति “नपी-तुली रियायतें” जारी हैं। उन्होंने लद्दाख में पारंपरिक गश्त अधिकारों के नुकसान, चीन से रिकॉर्ड आयात और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI नियमों में ढील जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।

कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत की व्यापक कूटनीतिक मुहिम के बावजूद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग नहीं किया जा सका। उन्होंने दावा किया कि इसके उलट जून 2025 के बाद से पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने गर्मजोशी से स्वागत किया और पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान से प्रशंसा मिली।

रमेश ने कहा कि 1999 में कारगिल युद्ध समाप्त होने के कुछ दिनों बाद तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने चार सदस्यीय कारगिल समीक्षा समिति गठित की थी। इस समिति की अध्यक्षता रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ के. सुब्रह्मण्यम ने की थी, जो वर्तमान विदेश मंत्री एस. जयशंकर के पिता थे।

उन्होंने बताया कि समिति ने “फ्रॉम सरप्राइज टू रेकनिंग” शीर्षक से अपनी रिपोर्ट 7 जनवरी 2000 को सौंपी थी और इसे 23 फरवरी 2000 को संसद में पेश किया गया था।

स्रोत:Others
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