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भारत-जापान वार्ता के बीच चीन ने कहा एशिया-प्रशांत को विभाजन नहीं, सहयोग चाहिए
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची बुधवार से भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं।
भारत-जापान वार्ता के बीच चीन ने कहा एशिया-प्रशांत को विभाजन नहीं, सहयोग चाहिए
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का अभिवादन किया।

भारत में जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की यात्रा और भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के बीच चीन ने “फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक” यानी FOIP अवधारणा पर एशिया-प्रशांत देशों से “सतर्क” रहने और क्षेत्र को “स्थिर, एकजुट और परस्पर सहयोगी” बनाए रखने की अपील की है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने गुरुवार को बीजिंग में पत्रकारों से कहा कि स्वतंत्रता और खुलेपन की बात करते हुए वास्तव में टकराव और विरोध की सोच रखना क्षेत्रीय देशों की शांति, विकास और सहयोग की साझा आकांक्षा के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि ऐसी अवधारणा को क्षेत्र में “वास्तविक मान्यता” नहीं मिलेगी।

गुओ ने कहा, “एशिया-प्रशांत को अशांति नहीं, स्थिरता चाहिए; विभाजन नहीं, सहयोग चाहिए।”

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची बुधवार से भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। वह गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल हुईं।

भारत यात्रा से पहले भारतीय मीडिया में प्रकाशित एक लेख में ताकाइची ने कहा था कि कमजोर स्थिति वाले देशों की स्वायत्तता और मजबूती बढ़ाने के लिए भारत और जापान को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि कोई भी देश बाहरी दबाव में चुनाव करने के लिए मजबूर न हो।

उन्होंने लिखा कि यही मई में पेश किए गए उनके “अपडेटेड FOIP” का मूल भाव है।

ताकाइची ने कहा कि वास्तव में स्वतंत्र और खुला क्षेत्र वह नहीं है, जहां केवल बड़ी शक्तियां स्वतंत्रता का लाभ उठाएं, बल्कि वह है जहां हर देश बाहरी दबाव से मुक्त होकर अपनी दिशा खुद तय कर सके।

हालांकि चीन ने इस दृष्टिकोण को क्षेत्रीय विभाजन और टकराव को बढ़ावा देने वाला बताया।

गुओ जियाकुन ने कहा कि विभाजन पैदा करने और टकराव भड़काने की कोशिशों के सामने क्षेत्रीय देशों के लिए और अधिक जरूरी हो गया है कि वे सतर्क रहें, एकजुट रहें और एशिया-प्रशांत सहयोग की सही दिशा पर कायम रहें।

उन्होंने कहा कि संवाद और परामर्श के जरिए आपसी विश्वास बढ़ाया जाना चाहिए और पारस्परिक लाभ वाले सहयोग के माध्यम से क्षेत्र में शांति कायम रखनी चाहिए।

चीनी प्रवक्ता ने कहा कि एशिया-प्रशांत को ऐसा क्षेत्र बनना चाहिए जो समृद्ध, स्थिर, खुला, आपस में जुड़ा, सबके लिए लाभकारी, समावेशी, एकजुट और परस्पर सहयोगी हो।

स्रोत:AA
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