भारत आने वाले वर्षों में अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर 74 नए भूमि बंदरगाह विकसित करने की योजना बना रहा है। इनमें चीन से लगी सीमा पर तीन और पाकिस्तान सीमा पर छह भूमि बंदरगाह प्रस्तावित हैं। भूमि बंदरगाह प्राधिकरण के अध्यक्ष जयंत सिंह के अनुसार, इस विस्तार का उद्देश्य पड़ोसी देशों के साथ व्यापार और यात्रियों की आवाजाही को अधिक सुरक्षित, तेज़ और सुगम बनाना है।
प्रस्तावित परियोजना के तहत चीन सीमा पर हिमाचल प्रदेश के नमग्या, उत्तराखंड के गुंजी और सिक्किम के नाथू ला में सुविधाएं विकसित किए जाने की योजना है। पाकिस्तान सीमा पर जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान के विभिन्न प्रवेश बिंदुओं को भूमि बंदरगाह नेटवर्क में शामिल किए जाने का प्रस्ताव है।
भूमि बंदरगाह सामान्य सीमा चौकियों से अधिक विकसित परिसर होते हैं, जहां सीमा शुल्क, आव्रजन, सुरक्षा जांच, माल भंडारण और यात्री सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती हैं। सरकार का मानना है कि नए केंद्रों से वैध व्यापार बढ़ेगा, सीमा पार आवाजाही में लगने वाला समय घटेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिलेगा।
भारत में फिलहाल 15 भूमि बंदरगाह संचालित हैं। केंद्र सरकार ने अगले दो से तीन वर्षों में 11 और भूमि बंदरगाह चालू करने की योजना भी घोषित की है। हाल में शुरू की गई भूमि बंदरगाह प्रबंधन प्रणाली के जरिए दस्तावेज़ी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने और सीमा पर माल तथा वाहनों की निकासी का समय कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
नई योजना का रणनीतिक महत्व भी है। चीन और पाकिस्तान से लगी संवेदनशील सीमाओं पर आधुनिक ढांचा विकसित होने से सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय, वैध आवाजाही की निगरानी और आपात परिस्थितियों में रसद व्यवस्था मजबूत हो सकती है।
हालांकि, 74 भूमि बंदरगाहों का प्रस्ताव अभी दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है। प्रत्येक परियोजना को भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण और सुरक्षा मंज़ूरी तथा संबंधित पड़ोसी देश के साथ समन्वय जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।























