भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने गुरुवार को यूक्रेन की अपनी पहली अलग द्विपक्षीय यात्रा की। इस दौरान उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से मुलाकात की।
कीव में जयशंकर से मुलाकात के बाद अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में जेलेंस्की ने कहा कि दोनों पक्षों ने “महत्वपूर्ण मुद्दों” पर चर्चा की। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने को लेकर भारत की प्रतिबद्धता के लिए नई दिल्ली का आभार जताया।
जेलेंस्की ने कहा, “यह निश्चित रूप से युद्ध का समय नहीं होना चाहिए। शांति की जरूरत है। यह भारत की स्पष्ट स्थिति है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि दुनिया की अन्य बड़ी शक्तियां भी यह स्पष्ट रुख अपनाएंगी कि जारी संघर्ष समाप्त होना चाहिए और भरोसेमंद शांति स्थापित की जानी चाहिए।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि बैठक में ब्लैक सी की स्थिति और नागरिक जहाजरानी को मौजूद खतरों पर भी चर्चा हुई।
जेलेंस्की ने कहा कि खाद्य आपूर्ति को रोकना पूरी तरह अस्वीकार्य है, खासकर उन क्षेत्रों के लिए जहां लोग समुद्री मार्गों पर निर्भर हैं। उन्होंने रूस पर यूक्रेनी बंदरगाहों, फूड कॉरिडोर और आपूर्ति को बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे वैश्विक संबंधों में गंभीर व्यवधान पैदा हो रहा है।
जयशंकर ने इससे पहले यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से मुलाकात की। यूक्रेनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों, ब्लैक सी सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की।
सिबिहा ने जयशंकर को रूसी हमलों में कथित बढ़ोतरी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन हमलों में जहाजों, यूक्रेनी बंदरगाहों और बंदरगाह ढांचे को निशाना बनाया गया है।
दोनों विदेश मंत्रियों ने शांति प्रक्रिया और संघर्ष समाप्त करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में भारत की अधिक भूमिका की संभावना पर भी चर्चा की।
सिबिहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी में कहा था कि “अंतहीन युद्ध” को समाप्त करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन इस स्थिति का समर्थन करता है और युद्ध खत्म करने के लिए उसके पास यथार्थवादी प्रस्ताव हैं।
बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयशंकर ने दोहराया कि युद्ध का समाधान कूटनीति से ही निकलेगा। उन्होंने कहा, “समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेंगे।” उन्होंने जोड़ा कि युद्ध समाप्त करने का रास्ता संबंधित पक्षों को ही तलाशना होगा।
जयशंकर ने कहा, “अगर भारत किसी भी तरह मदद कर सकता है, तो हम तैयार हैं।”
वार्ता में नौवहन की स्वतंत्रता, वैश्विक खाद्य सुरक्षा और व्यापक द्विपक्षीय एजेंडे पर भी चर्चा हुई।
सिबिहा ने कहा कि यूक्रेन भारत को एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय साझेदार के रूप में देखता है और व्यापक कूटनीतिक प्रयासों में उसकी संभावित भूमिका का स्वागत करता है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन भारत से संयुक्त राष्ट्र चार्टर, यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता, नौवहन की स्वतंत्रता तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के समर्थन की अपेक्षा करता है।
दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश और व्यावसायिक संबंधों के विस्तार पर भी चर्चा की, जिसमें यूक्रेन के पुनर्निर्माण में भारतीय भागीदारी की संभावना शामिल है।
सिबिहा के अनुसार, भारत और यूक्रेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार फिलहाल 2.6 अरब डॉलर है और इसमें आगे बढ़ोतरी की बड़ी संभावना है।
दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के उद्देश्य से अंतर-सरकारी आर्थिक आयोग की बैठक की तारीख पर भी चर्चा करेंगे।
यूक्रेन के अनुसार, ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, परिवहन, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, डिजिटलाइजेशन और मशीनरी जैसे क्षेत्र सहयोग के संभावित क्षेत्र हो सकते हैं।



















