नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में गांवों और ट्रेकिंग मार्गों को तबाह करने वाली भीषण अचानक बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 162 हो गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और खोज एवं बचाव अभियान हेलीकॉप्टरों और ड्रोन की मदद से जारी है।
हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह बाढ़ संभवतः रसुवा-रसुवागढ़ी सीमा क्रॉसिंग से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हिमालयी ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटने से आई। सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर आशंका जताई गई है कि भारी मात्रा में बर्फ और चट्टानें नीचे भोटेकोशी नदी में गिरीं, जिससे अचानक पानी का बहाव बेहद तेज हो गया।
नेपाल सरकार ने कहा है कि विस्थापित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है और खोज-बचाव कार्यों के लिए सेना तथा निजी हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों को लगाया गया है। नेपाली सेना और निजी हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने अब तक 114 लोगों को सुरक्षित निकाला है।
बागमती प्रांत के चितवन जिले में सबसे अधिक 64 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके बाद धादिंग में 27 और नवलपरासी ईस्ट में 22 लोगों की मौत हुई है।
लापता पर्यटकों में 100 से अधिक भारतीय, अमेरिका के 54, ऑस्ट्रेलिया के 34 और ब्रिटेन के 33 नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, उसके 28 अधिकारी भी अब तक लापता हैं।
प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक, बाढ़ ने 19 पुलों और एक प्रमुख राजमार्ग के करीब 40 किलोमीटर हिस्से को नष्ट कर दिया है। इससे परिवहन मार्ग कट गए हैं और राहत-बचाव अभियान और मुश्किल हो गया है।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि बाढ़ से कई जिलों में “अत्यधिक नुकसान” हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि अभी केवल शुरुआती जानकारी उपलब्ध है और नुकसान का वास्तविक आकलन आगे सामने आएगा।
उन्होंने नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन जिलों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी किनारे रहने वाले लोगों से अत्यधिक सतर्क रहने की अपील की है, क्योंकि इन क्षेत्रों में खतरा अभी भी बना हुआ है।
सरकार ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग को तीन महीने के लिए “disaster crisis areas” घोषित कर दिया है।






















