कुडनकुलम परमाणु संयंत्र से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज लीक
लीक हुई फाइलों में वेंटिलेशन और कूलिंग सिस्टम से जुड़े ब्लूप्रिंट, कॉमन कंट्रोल रूम के फ्लोर लेआउट, वेंडर प्रस्ताव, स्वीकृत सप्लायर सूचियां और संयुक्त निरीक्षण रिकॉर्ड शामिल बताए गए हैं।
कुडनकुलम परमाणु संयंत्र से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज लीक
FILE PHOTO: दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना के पास समुद्र तट पर पुलिस गश्त कर रही है।

भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में शामिल तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े बेहद संवेदनशील आंतरिक दस्तावेजों के लीक होने का मामला सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, एक रैनसमवेयर समूह ने डार्क वेब पर हजारों फाइलें सार्वजनिक की हैं, जिनमें संयंत्र की बुनियादी संरचना, सप्लायर नेटवर्क और प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।

लीक कथित तौर पर रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े एक थर्ड-पार्टी सर्वर से हुआ। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर कुडनकुलम परमाणु संयंत्र की कुछ इकाइयों से जुड़े निर्माण और डिजाइन कार्यों का प्रमुख कॉन्ट्रैक्टर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ल्ड लीक नामक रैनसमवेयर समूह ने रिलायंस समूह से जुड़े 8.58 लाख दस्तावेजों के बड़े कैश में से करीब 19,000 अत्यधिक संवेदनशील फाइलें सार्वजनिक की हैं। ये दस्तावेज 2016 से लेकर 2025 के मध्य तक की अवधि से जुड़े बताए जा रहे हैं।

लीक हुई फाइलों में वेंटिलेशन और कूलिंग सिस्टम से जुड़े ब्लूप्रिंट, कॉमन कंट्रोल रूम के फ्लोर लेआउट, वेंडर प्रस्ताव, स्वीकृत सप्लायर सूचियां और संयुक्त निरीक्षण रिकॉर्ड शामिल बताए गए हैं। कुछ दस्तावेजों में उपकरणों की तस्वीरें भी होने की बात कही गई है।

हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि लीक दस्तावेज रूसी कंपनी रोसाटॉम द्वारा आपूर्ति किए गए रिएक्टर कोर सिस्टम का नक्शा नहीं दिखाते, लेकिन इनमें संयंत्र के महत्वपूर्ण सपोर्ट सिस्टम से जुड़ी जानकारी मौजूद है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह का डेटा लीक परमाणु स्थल की सुरक्षा और संचालन के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। न्यूक्लियर थ्रेट इनिशिएटिव के वरिष्ठ निदेशक निकोलस रोथ के अनुसार, ऐसे दस्तावेज किसी विरोधी को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि परियोजना तक किसकी पहुंच है और वह पहुंच किन प्रणालियों तक जाती है।

रिलायंस समूह ने अपने डेटा में “आंशिक सेंध” की पुष्टि की है। कंपनी के अनुसार, यह डेटा भारतीय डेटा सेंटर प्रदाता योट्टा के पास होस्ट किया गया था।

योट्टा ने बताया कि उसने मई के अंत में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर सर्वर पर संदिग्ध गतिविधि पकड़ी थी और संभावित रैनसमवेयर निष्पादन को रोक दिया था। इसके बावजूद हमलावर बड़ी मात्रा में परियोजना से जुड़ा डेटा बाहर निकालने में सफल रहे।

भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम यानी CERT-In समेत भारतीय अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

लीक हुए दस्तावेज मुख्य रूप से कुडनकुलम संयंत्र की यूनिट 3 और 4 से जुड़े बताए जा रहे हैं। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर को 2018 में इन इकाइयों के डिजाइन और निर्माण से जुड़ा अनुबंध मिला था।

इन दोनों इकाइयों से कुल 2,000 मेगावाट बिजली उत्पादन की उम्मीद है और इनके 2027 तक चालू होने की योजना है।

कुडनकुलम परियोजना भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की रणनीति में अहम मानी जाती है। सरकार देश में परमाणु ऊर्जा उत्पादन को तेजी से विस्तार देने पर जोर देती रही है।

स्रोत:Other
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