पश्चिम बंगाल में जमीयत-ए-उलेमा की राज्य इकाई ने मंगलवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान कथित तौर पर 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने और मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। मार्च कलकत्ता हाई कोर्ट की अनुमति के बाद आयोजित किया गया। जिससे पहले कोलकाता पुलिस ने जुलूस की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जमीयत-ए-उलेमा द्वारा पहले आयोजित एक जुलूस में कथित हिंसा का भी हवाला दिया। हालांकि, अदालत ने कहा कि यह आरोप पुलिस की मूल अस्वीकृति सूचना में शामिल नहीं था। अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य बाद में अनुमति न देने के कारणों को बेहतर बनाकर पेश नहीं कर सकता।
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