भारत ने रविवार को चीन को कड़ा संदेश देते हुए द्विपक्षीय संबंधों में “नकारात्मकता न घोलने” की सलाह दी। यह प्रतिक्रिया चीन द्वारा भारतीय क्षेत्रों को कथित तौर पर “काल्पनिक नाम” देने की खबरों के बाद आई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि भारत ऐसे सभी “शरारती प्रयासों” को सिरे से खारिज करता है, जिनके तहत भारत के हिस्सों को नए या काल्पनिक नाम दिए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “भारत स्पष्ट रूप से चीन की उन कोशिशों को अस्वीकार करता है, जिनमें हमारे अभिन्न हिस्सों को गलत नाम देकर भ्रम पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।”
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच लंबे समय से विवाद जारी है। चीन इस राज्य को “जांगनान” के नाम से संबोधित करता है और इसे अपना हिस्सा बताता रहा है, जबकि भारत इसे अपने संप्रभु क्षेत्र का अभिन्न अंग मानता है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि “ऐसे निराधार दावे और झूठे आख्यान गढ़ने की कोशिशें इस सच्चाई को नहीं बदल सकतीं कि ये सभी क्षेत्र—जिसमें अरुणाचल प्रदेश भी शामिल है—भारत के थे, हैं और हमेशा रहेंगे।”
भारत और चीन के बीच करीब 3,500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर मई 2020 से तनाव बना हुआ है, खासकर लद्दाख क्षेत्र में।
हालांकि, 2024 के बाद दोनों देशों के संबंधों में कुछ नरमी देखी गई है और द्विपक्षीय रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं।
भारत ने कहा कि चीन की इस तरह की कार्रवाइयां “रिश्तों को स्थिर और सामान्य बनाने के प्रयासों को कमजोर करती हैं।”
विदेश मंत्रालय ने बीजिंग से अपील की कि वह ऐसे कदमों से बचे, जो आपसी विश्वास को नुकसान पहुंचाते हैं।
प्रवक्ता ने कहा, “चीन को ऐसे कदम उठाने से बचना चाहिए जो संबंधों में नकारात्मकता पैदा करें और बेहतर समझ विकसित करने के प्रयासों को कमजोर करें।”











