दुनिया “खतरनाक मोड़” पर: अंटाल्या डिप्लोमेसी फोरम में राष्ट्रपति एर्दोआन

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए एर्दोआन ने कहा कि मानवाधिकार और वैश्विक सुरक्षा की रक्षा के लिए बने अंतरराष्ट्रीय तंत्र बड़े संकटों के सामने या तो अप्रभावी साबित हुए हैं या उदासीन रहे हैं।

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तुर्किए के राष्ट्रपति रेजप तैय्यप एर्दोआन / TRT World

तुर्किए के राष्ट्रपति रेजप तैय्यप एर्दोआन ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया शक्ति और दिशा—दोनों स्तरों पर गहराते संकट का सामना कर रही है और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था “गंभीर और खतरनाक मोड़” पर पहुंच चुकी है।

अंताल्या कूटनीति मंच 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए एर्दोआन ने कहा कि मानवाधिकार और वैश्विक सुरक्षा की रक्षा के लिए बने अंतरराष्ट्रीय तंत्र बड़े संकटों के सामने या तो अप्रभावी साबित हुए हैं या उदासीन रहे हैं।

उन्होंने मौजूदा हालात को “नैतिक और अस्तित्व का संकट” बताया और कहा कि 7 अक्टूबर के बाद गाज़ा में जो स्थिति बनी है, वह इस विफलता का स्पष्ट उदाहरण है।
एर्दोआन ने कहा, “गाज़ा में जो हो रहा है, उसे केवल मानवीय त्रासदी के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की सीमाओं को उजागर करता है।”

उन्होंने सीरिया, गाज़ा, वेस्ट बैंक और लेबनान जैसे क्षेत्रों में वैश्विक प्रतिक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय “मानवता की सबसे बुनियादी परीक्षा” में विफल रहा है।एर्दोआन ने विवादों के समाधान के लिए कूटनीति को प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने कहा,

“मतभेद कितने भी गहरे क्यों न हों, हमें शब्दों की जगह हथियारों और बातचीत की जगह खून-खराबे को नहीं आने देना चाहिए।”

अमेरिका, इज़राइल और ईरान से जुड़े तनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संघर्ष विराम से बने अवसर का उपयोग स्थायी शांति स्थापित करने के लिए किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि वार्ता प्रक्रिया को कमजोर करने की किसी भी कोशिश के प्रति सतर्क रहना जरूरी है।