भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि देश ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका के साथ ऊर्जा व्यापार को बढ़ा रहा है। उन्होंने यह बात रविवार को नई दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही।
जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा की उपलब्धता और किफायती कीमतें भारत के लिए सबसे अहम उद्देश्य हैं। जयशंकर ने कहा कि हाल के महीनों में भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा व्यापार में विस्तार हुआ है और विविध आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के केंद्र में है।
जयशंकर ने कहा भारत ऊर्जा का बड़ा आयातक देश है और वह चाहता है कि ऊर्जा कीमतें कम हों। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्र में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार का समर्थन करता है। यह बयान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि भारत और अमेरिका एक ऐसे व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद और टिकाऊ होगा। रायटर्स के मुताबिक, रुबियो ने भारत को अमेरिका का “महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार” बताया और कहा कि दोनों देश आतंकवाद और ऊर्जा के मुद्दों पर एक जैसी सोच रखते हैं।
वार्ता के दौरान जयशंकर ने भारतीय यात्रियों और छात्रों को अमेरिकी वीज़ा जारी करने में आ रही दिक्कतों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भारत अवैध और अनियमित आवाजाही से निपटने में सहयोग करेगा, लेकिन वैध आवाजाही पर इसका नकारात्मक असर नहीं पड़ना चाहिए।
भारतीयों के खिलाफ कथित नस्लवादी टिप्पणियों पर सवाल के जवाब में रुबियो ने कहा कि हर देश में कुछ लोग आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक स्वागत करने वाला देश है और दुनिया भर से आए लोगों ने उसे समृद्ध बनाया है।
बैठक में दोनों देशों ने ऊर्जा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। भारत ने साफ किया कि वह रूस, अमेरिका, यूरोप, यूक्रेन और पश्चिम एशिया के देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है।

















