इस्लामाबाद ने ईरान के रास्ते उज्बेकिस्तान को निर्यात की पहली खेप भेजी

हाल ही में पाकिस्तान ने अपने निर्यात नियमों में ढील दी है, जिससे खाद्य पदार्थ, दवाइयां और टेंट जैसी वस्तुओं को ईरान के रास्ते मध्य एशिया भेजने की अनुमति दी गई है।

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तेल टैंकर 19 जून, 2025, गुरुवार को पाकिस्तान-ईरान सीमा पर स्थित संयुक्त सीमा चौकी ताफ़्तान के रास्ते ईरान में प्रवेश करते हैं। / AP

पाकिस्तान ने ईरान के रास्ते मध्य एशिया तक एक नया व्यापारिक मार्ग शुरू किया है, जिसे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल इस्लामाबाद और तेहरान के बीच बेहतर होते संबंधों का संकेत है, खासकर ऐसे समय में जब पाकिस्तान ने मध्य पूर्व में संघर्ष को रोकने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

इस नए पाक-ईरान ट्रांजिट कॉरिडोर के तहत पहली खेप जिसमें जमे हुए मांस (फ्रोजन मीट) शामिल था शुक्रवार को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद भेजी गई, जिससे इस मार्ग का औपचारिक संचालन शुरू हो गया।

इस व्यवस्था के तहत पाकिस्तान से भेजा गया माल ग्वादर पोर्ट के जरिए ईरान होते हुए मध्य एशियाई देशों तक पहुंचेगा। ग्वादर पोर्ट चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) का प्रमुख हिस्सा है।

हाल ही में पाकिस्तान ने अपने निर्यात नियमों में ढील दी है, जिससे खाद्य पदार्थ, दवाइयां और टेंट जैसी वस्तुओं को ईरान के रास्ते मध्य एशिया भेजने की अनुमति दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस पहल में चीन की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

करीब 64 अरब डॉलर की लागत वाला CPEC प्रोजेक्ट चीन के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र को ग्वादर पोर्ट से जोड़ता है, जिससे मध्य एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका तक व्यापारिक पहुंच आसान होती है।

पन्हवार ने कहा कि चीन इस कॉरिडोर के जरिए CPEC की कनेक्टिविटी को मध्य एशिया तक विस्तार देना चाहता है।

मध्य एशिया और अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान का व्यापार 2025 में बढ़कर 2.41 अरब डॉलर हो गया, जो 2024 में 1.92 अरब डॉलर था। इसमें निर्यात 1.77 अरब डॉलर और आयात 641 मिलियन डॉलर रहा।