अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा के पास प्रस्तावित विशाल जलविद्युत परियोजना के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों के बाद भारत ने इलाके में सैकड़ों अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, सियांग घाटी में बांध निर्माण का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पिछले सप्ताह झड़पें हुई थीं।
मंगलवार को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।
प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से आदि जनजाति से संबंधित हैं। उन्हें आशंका है कि प्रस्तावित बांध के निर्माण से उनके पुश्तैनी गांव और जमीन जलमग्न हो जाएंगे।
द टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह सियांग घाटी में बांध विरोधी प्रदर्शन हिंसक हो गए थे।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, जबकि पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।
इस दौरान एक पुलिस स्टेशन और सरकारी जलविद्युत कंपनी नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन के कार्यालय में आग लगा दी गई।
हिंसा के बाद प्रशासन ने क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की है।
विवाद के केंद्र में प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट है, जिसकी बिजली उत्पादन क्षमता 11,200 मेगावाट निर्धारित की गई है।
इस परियोजना को सरकारी कंपनी एनएचपीसी द्वारा विकसित किया जाना है।
भारत सरकार का कहना है कि यह परियोजना चीन द्वारा तिब्बत में बनाई जा रही विशाल जलविद्युत परियोजना के संभावित प्रभावों का मुकाबला करने के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, स्थानीय समुदायों का कहना है कि परियोजना के निर्माण से उनके घरों, कृषि भूमि और पारंपरिक जीवन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
सियांग घाटी में रहने वाले आदि जनजाति के लोग लंबे समय से प्रस्तावित बांध को लेकर चिंता जता रहे हैं।
उनका कहना है कि विशाल जलाशय बनने की स्थिति में उनके पुश्तैनी गांव पानी में डूब सकते हैं।
इससे स्थानीय निवासियों को विस्थापन का सामना करना पड़ सकता है और उनकी जमीन तथा आजीविका प्रभावित हो सकती है।
बांध के विरोध ने जलविद्युत विकास परियोजनाओं के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।























