छत्तीसगढ़ में शनिवार को एक आईईडी विस्फोट में चार पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। यह घटना राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा बलों के अभियान के दौरान हुई।
राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पी. सुंदरराज के अनुसार, हाल के महीनों में बड़ी संख्या में माओवादी विद्रोहियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है और पुनर्वास की दिशा में आगे आए हैं। इसके बाद सुरक्षा बलों ने जंगलों में छिपाकर रखे गए माओवादियों के ठिकानों को साफ करने का अभियान तेज कर दिया है।
उन्होंने बताया कि नारायणपुर और कांकेर जिलों की सीमा से लगे वन क्षेत्र में एक टीम को माओवादियों द्वारा छिपाए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद करने के लिए भेजा गया था। इसी दौरान एक अन्य छिपे हुए ठिकाने की तलाशी लेते समय आईईडी में विस्फोट हो गया।
अधिकारी ने कहा, “जब टीम एक और डंप को बरामद कर रही थी, तभी आईईडी विस्फोट हुआ,” जिसमें चार पुलिसकर्मियों की जान चली गई।
पूर्वी और मध्य भारत में सक्रिय माओवादी विद्रोही, जिन्हें नक्सली भी कहा जाता है, पिछले तीन दशकों से अधिक समय से आदिवासी समुदायों के अधिकारों की मांग को लेकर सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं।
इस बीच, मार्च में राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दावा किया था कि छत्तीसगढ़ में सशस्त्र नक्सलियों का “पूरी तरह सफाया” कर दिया गया है। यह बयान केंद्र सरकार द्वारा मार्च 2026 तक इस विद्रोह को खत्म करने के बार-बार किए गए वादों के बाद आया था।


















