लोकसभा में मध्य पूर्व युद्ध के असर पर बहस, विपक्ष ने युद्ध के अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पूछे
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सरकार से पूछा कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध का भारत पर क्या असर पड़ेगा और 30 अप्रैल के बाद आर्थिक स्थिति कैसी होगी
लोकसभा में मंगलवार को वित्त विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान मध्य पूर्व में जारी युद्ध के भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव को लेकर तीखी बहस हुई। विपक्ष ने केंद्र सरकार से सवाल किए और केंद्र पर अमेरिका को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता सौंपने का आरोप लगाया।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते से भारतीय बाजार अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खुल सकता है।
उन्होंने रुपये में गिरावट, विदेशी निवेश (FDI और FPI) के बाहर जाने और आर्थिक सुस्ती पर भी चिंता जताई।
तिवारी ने सरकार से पूछा कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध का भारत पर क्या असर पड़ेगा और 30 अप्रैल के बाद आर्थिक स्थिति कैसी होगी, जब बंगाल चुनाव का दूसरा चरण समाप्त होगा।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने रुपये की गिरती कीमत को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जब 2009 में कच्चे तेल की कीमत 147 डॉलर प्रति बैरल थी, तब भी रुपया 48 प्रति डॉलर था, जबकि 2014 में यह 60 प्रति डॉलर था।
उन्होंने कहा, “सरकार भारत को सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बताती है, लेकिन शोध के मुताबिक हम सबसे तेज़ी से गिरती मुद्रा वाले देशों में हैं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा था कि पश्चिम एशिया संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को "हिला दिया" है और दुनिया को इसके प्रभाव से उबरने में "लंबा समय" लगेगा। राज्यसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।