पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए अलग-अलग अभियानों में कम से कम 17 संदिग्ध उग्रवादी और एक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं। पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
समाचार एजेंसी अनादोलु के अनुसार, ये अभियान बलूचिस्तान के कच्छी और खारान जिलों में चलाए गए। सेना ने बताया कि खुफिया जानकारी के आधार पर की गई कार्रवाई में उग्रवादियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया।
पाकिस्तानी सेना ने अपने बयान में भारत पर आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने का आरोप भी लगाया। हालांकि, भारत इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
पाकिस्तानी सेना के अनुसार, रविवार को बलूचिस्तान के कच्छी जिले में खुफिया जानकारी के आधार पर एक सैन्य अभियान चलाया गया।
सेना ने बताया कि इस कार्रवाई के दौरान 10 संदिग्ध उग्रवादी मारे गए।
बयान में कहा गया कि अभियान क्षेत्र में उग्रवादी गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की।
हालांकि, मारे गए लोगों की पहचान और उनके किसी संगठन से संबंध के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।
एक अलग अभियान में सुरक्षा बलों ने बलूचिस्तान के खारान जिले में उग्रवादियों के एक कथित ठिकाने पर छापा मारा।
पाकिस्तानी सेना के अनुसार, इस दौरान सुरक्षा बलों और संदिग्ध उग्रवादियों के बीच भीषण गोलीबारी हुई।
इस मुठभेड़ में सात उग्रवादी मारे गए, जबकि एक पाकिस्तानी सैनिक की भी मौत हो गई।
सेना ने बताया कि इलाके में अन्य संदिग्ध उग्रवादियों की मौजूदगी की आशंका को देखते हुए तलाशी अभियान जारी है।
पाकिस्तानी सेना ने अपने बयान में कहा कि क्षेत्र में मौजूद अन्य संदिग्ध आतंकवादियों का पता लगाने और उन्हें समाप्त करने के लिए अभियान जारी रखे जा रहे हैं।
बयान में सेना ने इन आतंकवादियों को 'भारत प्रायोजित' बताया।
हालांकि, इस दावे के समर्थन में बयान में कोई विशिष्ट साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से अपने यहां बढ़ते उग्रवादी हमलों के लिए भारत और अफगानिस्तान को जिम्मेदार ठहराता रहा है।
भारत और अफगानिस्तान दोनों ही इन आरोपों को खारिज करते हैं।
बलूचिस्तान पाकिस्तान का क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा प्रांत है। देश के कुल भूभाग का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा इसी प्रांत में आता है।
खनिज संसाधनों से समृद्ध यह क्षेत्र लंबे समय से उग्रवादी हिंसा और सुरक्षा अभियानों का केंद्र रहा है।
प्रांत का रणनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि अरबों डॉलर की चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा परियोजना (CPEC) का एक महत्वपूर्ण मार्ग बलूचिस्तान से होकर गुजरता है।
पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उग्रवादी हमलों की संख्या बढ़ी है, जिसके चलते विभिन्न इलाकों में सुरक्षा अभियानों को तेज किया गया है।





















